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छत्तीसगढ़दुर्ग-भिलाई

अपराधियों की खैर नहीं: फिंगरप्रिंट से डिजिटल सबूत तक, दुर्ग पुलिस की जांच हुई हाईटेक

       दुर्ग। पुलिस ने अपराधों की जांच को पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ाते हुए वैज्ञानिक साक्ष्य और डिजिटल तकनीक से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 13 अगस्त 2026 को जिले में एक ही दिन दो महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें पुलिसकर्मियों को घटनास्थल से सबूत जुटाने से लेकर डिजिटल रिपोर्टिंग तक की बारीकियां समझाई गईं।

       पुलिस लाइन स्थित दधीचि भवन में जिले के विवेचकों और MOB आरक्षकों के लिए फिंगरप्रिंट एवं चांस प्रिंट संबंधी विशेष प्रशिक्षण आयोजित हुआ। रायपुर के फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट एवं उप पुलिस अधीक्षक अजय साहू ने पुलिसकर्मियों को बताया कि अपराध स्थल पर छूटी एक छोटी-सी उंगली की छाप भी आरोपी तक पहुंचने की अहम कड़ी बन सकती है। प्रशिक्षण में फिंगरप्रिंट की पहचान, ट्रैकिंग, डेवलपिंग, संरक्षण और मिलान की व्यावहारिक प्रक्रिया के साथ फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई।

       खास बात यह रही कि प्रशिक्षण में CRPI Act, 2022 और NAFIS के उपयोग पर भी जोर दिया गया। इससे संदिग्ध या अज्ञात व्यक्तियों की पहचान को अधिक तेज और वैज्ञानिक बनाने में मदद मिलेगी।

       वहीं, पुलिस कंट्रोल रूम सेक्टर-06 भिलाई में पुलिस, FSL, अभियोजन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच अंतरविभागीय समन्वय बैठक हुई। इसमें E-FSL, E-Prosecution, MLC और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ऑनलाइन उपलब्ध कराने तथा E-Challan की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।

       दुर्ग पुलिस का लक्ष्य साफ है—जांच में अनुमान नहीं, वैज्ञानिक प्रमाण; कागजी देरी नहीं, डिजिटल तेजी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में किए जा रहे इन प्रयासों से विवेचना की गुणवत्ता बढ़ने और न्यायालय में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत करने की उम्मीद है। अब अपराध की जांच में घटनास्थल का हर निशान और हर डिजिटल रिकॉर्ड अहम कड़ी बनेगा।

 

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