Google Analytics —— Meta Pixel
छत्तीसगढ़दुर्ग-भिलाई

अहिवारा के बानबरद में शिक्षा जगत की बड़ी पहल – राज्य स्तरीय शिक्षक संगोष्ठी में नई शिक्षा नीति 2020 पर गहन मंथन

       नंदिनी, अहिवारा। दुर्ग जिले के बानबरद (अहिवारा) में शनिवार 4 अक्टूबर 2025 को राज्य सर्व शिक्षक परिषद छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ संघर्षशील व्याख्याता संघ एवं राज्य कर्मचारी संघ छ.ग. शिक्षा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय शिक्षक संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।

       कार्यक्रम का मुख्य विषय “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 : परंपरागत सैद्धांतिक शिक्षण में नैतिक मूल्य और उद्यमशील शिक्षा का समावेश” रहा, जिस पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

मुख्य अतिथि बने बिसराराम यादव

       इस संगोष्ठी में पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव उपस्थित नहीं हो पाए। उनकी अनुपस्थिति में मुख्य अतिथि के रूप में श्री बिसराराम यादव ने संगोष्ठी की गरिमा बढ़ाई।

अध्यक्षता और विशिष्ट अतिथि

       कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईटी भिलाई के निदेशक माननीय प्रो. राजीव प्रकाश ने की। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार एवं शिक्षाविद आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा (प्राचार्य, सेवाभावी महाविद्यालय) ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

विचार-विमर्श और संदेश

       संगोष्ठी में वक्ताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान, नैतिक मूल्य और उद्यमशीलता को विशेष स्थान दिया गया है।

       मुख्य अतिथि बिसराराम यादव ने कहा कि शिक्षक समाज की आत्मा होते हैं और नई शिक्षा नीति का सफल क्रियान्वयन तभी संभव है जब शिक्षक इसकी बारीकियों को आत्मसात कर विद्यार्थियों तक पहुंचाएं।

स्थानीय शिक्षकों की सहभागिता

       इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, व्याख्याता और शिक्षा प्रेमी उपस्थित हुए। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने नीति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए इसे व्यवहारिक धरातल पर लागू करने के सुझाव भी दिए।

       ज्ञान सिंह राजपूत (दुर्ग), तुलाराम साहू (भिलाई), उत्तमकुमार साहू (अहिवारा), रजेंद्र कुमार साहू (बेमेतरा) एवं अरुण कुमार साहू (रायपुर) ने संगोष्ठी की सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।

       यह संगोष्ठी शिक्षा जगत के लिए उपयोगी साबित हुई और उपस्थित शिक्षकों ने इसे एक ऐतिहासिक पहल बताया।

Related Articles

Back to top button