——
छत्तीसगढ़रायपुर

आंकड़े, दस्तावेज और दावे—रायपुर प्रेस क्लब में आमने-सामने आए बघेल और शर्मा

       रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर चल रही सियासी जंग मंगलवार को रायपुर प्रेस क्लब में आमने-सामने की बहस तक पहुंच गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच करीब 80 मिनट तक तीखी बहस हुई। दोनों नेताओं ने अपने-अपने आंकड़े, दस्तावेज और तर्क सामने रखते हुए एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाए। बहस के बाद भी आधिकारिक तौर पर किसी एक पक्ष को विजेता घोषित नहीं किया गया।

       दरअसल, पीएम आवास योजना लंबे समय से छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा रही है। इसी मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को खुली बहस की चुनौती दी थी। बघेल ने चुनौती स्वीकार करते हुए प्रेस क्लब में बहस के लिए सहमति जताई थी।

विजय शर्मा ने गिनाए सरकार के आंकड़े

       बहस में विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत प्रदेश में हुए निर्माण को लेकर सरकार के आंकड़े सामने रखे। उन्होंने दावा किया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 5.92 लाख से अधिक पीएम आवास पूरे किए गए, जो उनके अनुसार देश में सर्वाधिक है। इससे पहले अगस्त में शर्मा ने बताया था कि साय सरकार के गठन के बाद प्रदेश में 11 लाख से अधिक पीएम आवास पूरे किए जा चुके हैं।

       विजय शर्मा ने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान केंद्र से मिले लक्ष्यों और राशि का अपेक्षित उपयोग नहीं हुआ तथा समय पर आवास निर्माण आगे नहीं बढ़ पाया। उन्होंने अपने पक्ष में केंद्रीय स्तर के आंकड़ों और पत्राचार का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार पुराने और नए स्वीकृत आवासों को पूरा कराने पर जोर दे रही है।

भूपेश बघेल ने उठाए स्वीकृति और पोर्टल के सवाल

       पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार के दावों पर पलटवार करते हुए अपने कार्यकाल के दौरान स्वीकृत और निर्मित आवासों का ब्यौरा सामने रखा। उनका कहना था कि 2018 से 2023 के बीच बड़ी संख्या में आवास स्वीकृत किए गए थे और कोरोना महामारी के बावजूद निर्माण कार्य कराया गया।

       बघेल ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पोर्टल बंद रहने और राशि जारी नहीं होने के कारण योजना के क्रियान्वयन में बाधा आई। उन्होंने वर्तमान सरकार से यह भी सवाल किया कि जिन आवासों के आंकड़े सामने रखे जा रहे हैं, उनमें स्वीकृति, निर्माण और पूर्णता की अलग-अलग स्थिति क्या है। बहस के दौरान उन्होंने सरकार से अधूरे और स्वीकृत आवासों के आंकड़ों को स्पष्ट करने की मांग की।

सरकारी रिकॉर्ड में भी अलग-अलग चरणों के आंकड़े

       पीएम आवास योजना के आंकड़ों को समझने के लिए स्वीकृत आवास और पूर्ण आवास के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार के एक आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, 21 जुलाई 2025 तक छत्तीसगढ़ के लिए पीएमएवाई-जी में 26,42,224 आवासों का लक्ष्य, 23,72,372 स्वीकृत मकान और 14,82,808 पूर्ण मकान दर्ज थे।

       बाद के राज्य स्तरीय आंकड़ों में संख्या बढ़ी। इससे साफ है कि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों को एक ही समयावधि का मानकर तुलना करने से भ्रम पैदा हो सकता है। इसलिए दोनों नेताओं के दावों को समझने के लिए वित्तीय वर्ष, स्वीकृति, प्रथम किस्त, निर्माणाधीन और पूर्ण आवास के अलग-अलग आंकड़ों को देखना जरूरी है।

बहस के बाद बाहर भी गरमाया माहौल

       करीब 80 मिनट चली बहस के बाद प्रेस क्लब के बाहर दोनों राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच नारेबाजी और तीखी नोकझोंक की स्थिति भी बनी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। इस पूरे घटनाक्रम ने पीएम आवास योजना को एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

       फिलहाल बहस में किसी एक पक्ष की आधिकारिक जीत नहीं हुई। विजय शर्मा ने सरकारी और केंद्रीय आंकड़ों के आधार पर अपनी बात रखी, जबकि भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल की स्वीकृतियों, केंद्र से कथित बाधाओं और पोर्टल से जुड़े सवालों को सामने रखा। ऐसे में असली तस्वीर तभी पूरी तरह स्पष्ट होगी, जब समान अवधि और समान श्रेणी के आधिकारिक आंकड़ों—स्वीकृत, निर्माणाधीन और पूर्ण आवास—को एक साथ रखकर देखा जाए।

Related Articles

Back to top button