नाबालिग के गर्भवती होने से मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा, 10 ठिकानों पर दबिश, 1.48 करोड़ कैश जब्त, 5 गिरफ्तार

महासमुंद। जिले से मानव तस्करी के उस काले साम्राज्य का खुलासा, जिसने गरीब मजदूर परिवारों को कर्ज, लालच और दबाव के जाल में जकड़ रखा था! मानव तस्करी की आड़ में नाबालिग से दैहिक शोषण का आरोप… नाबालिग के गर्भवती होने के बाद खुला पूरा राज! महासमुंद और ओडिशा के कथित मजदूर दलालों का नेटवर्क…महासमुंद से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, गुजरात समेत दूसरे राज्यों तक मजदूरों की आवाजाही का आरोप!
पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार का कहना है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पहले एडवांस रकम का लालच, फिर कर्ज का दबाव और उसके बाद दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों में कथित बंधुआ मजदूरी के लिए भेजा जाता था और जब जांच की परतें खुलीं तो सामने आया मानव तस्करी, बाल मजदूरी और नाबालिगों के शोषण का कथित संगठित नेटवर्क।
महासमुंद पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के निर्देशन में पुलिस ने इस कथित सिंडिकेट पर बड़ा शिकंजा कसते हुए महासमुंद और ओडिशा में 10 ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई में 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नकद, मजदूर पलायन के रजिस्टर-डायरी, मोबाइल, बैंक दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की गई। पांच आरोपी गिरफ्तार… लेकिन सवाल बड़ा है—क्या यह पूरा नेटवर्क सिर्फ पांच लोगों तक सीमित है?
21 सितंबर… एक अस्पताल मेमो… और यहीं से खुलती है मानव तस्करी के कथित काले कारोबार की परत। पुलिस के मुताबिक, एक नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आने के बाद जांच शुरू हुई। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क के सुराग मिले, जिसमें गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को एडवांस रकम देकर कर्ज के जाल में फंसाने और फिर दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए भेजने का आरोप है। पुलिस के अनुसार परिवारों को ईंट भट्ठों तक पहुंचाने के बाद उन पर काम करने का दबाव बनाया जाता था। यानी पहले जरूरत का फायदा… फिर कर्ज… और उसके बाद मजदूरी के नाम पर कथित बंधुआपन।
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप 15 वर्षीय नाबालिग बालिका से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार नाबालिग को भी परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के एक ईंट भट्ठे पर भेजा गया था। आरोप है कि वहां उससे उसकी उम्र और क्षमता के विपरीत मजदूरी कराई गई और इसी दौरान भट्ठे के जेसीबी चालक पर नाबालिग के शारीरिक शोषण का आरोप सामने आया। एक नाबालिग… मजदूरी के लिए दूसरे राज्य पहुंची… और वहीं उसके साथ कथित अपराध हुआ। यही मामला पुलिस की जांच को मानव तस्करी के कथित बड़े नेटवर्क तक ले गया।
इसके बाद महासमुंद पुलिस ने ओडिशा तक फैले कथित नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की। 10 ठिकाने… कई संदिग्ध दस्तावेज… और करोड़ों की नकदी। पुलिस के मुताबिक तलाशी के दौरान मजदूर पलायन के रजिस्टर और डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्टगेज स्टांप दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन बरामद की गई।
पुलिस का दावा है कि इन दस्तावेजों की जांच में बड़ी संख्या में मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजे जाने से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं। अब इन दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की मदद से पुलिस कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है
इस कार्रवाई में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुकेश चंद्राकर, नसीम बानो उर्फ लता सबर, मनीष गुप्ता, नंदकुमार मोहंती उर्फ नंदू और पीयूष अग्रवाल शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है और विवेचना के दौरान बीएनएस की धारा 111 के तहत संगठित अपराध का प्रावधान जोड़ा गया है।
अब जांच सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, सीडीआर, बैंक खातों और बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है। किसने मजदूरों को जोड़ा?किसने एडवांस रकम दी? किसने उन्हें दूसरे राज्यों तक पहुंचाया?किन ईंट भट्ठों पर मजदूर भेजे गए? और इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं? इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
महासमुंद में मानव तस्करी के कथित साम्राज्य पर पुलिस की बड़ी चोट…10 ठिकानों पर दबिश… करीब डेढ़ करोड़ रुपये की नकदी जब्त… पांच गिरफ्तार… और अब मोबाइल से लेकर बैंक खातों तक खंगाले जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है क्या पांच गिरफ्तारियां इस कथित सिंडिकेट का अंत हैं… या फिर इनके पीछे अभी कई और चेहरे सामने आना बाकी हैं?



