प्रधान आरक्षक की पत्नी-बेटी की हत्याकांड मामले में 3 को फांसी की सजा, 1 को उम्रकैद, दो हुए दोषमुक्त

सूरजपुर। प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की धारदार हथियार से हत्या करने के बाद दोनों का शव खेत में निर्वस्त्र हालत में फेंकने वाले तीन आरोपियों को जिसमें मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, पूर्व एनएसयूआई जिलाध्यक्ष चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके, फूल सिंह उर्फ रिंकू को फांसी की सजा सुनाई, जबकि चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सुनवाई के बाद न्यायालय ने सूरज साहू और निलकेश्वर साहू को दोषमुक्त कर दिया। इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मामले की सुनवाई सूरजपुर फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। कोर्ट ने 28 सितंबर को 4 आरोपियों को दोषी पाया था और फैसला 8 अक्टूबर के लिए सुरक्षित रख लिया था। आज कोर्ट में सजा सुनाए जाने के दौरान काफी गहमागहमी की स्थिति रही।
उल्लेखनीय है कि सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की 13 अक्टूबर 2024 की रात नृशंस हत्या कर दी गई थी। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू ने अपने साथियों के साथ इस वारदात को अंजाम दिया था। जांच के दौरान मामले में रेप की भी पुष्टि हुई। वारदात के बाद आरोपियों ने दोनों शवों को कार में ले जाकर खेत में फेंक दिया था। घटना के सामने आने के बाद पूरे जिले में आक्रोश फैल गया था। इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत 4 आरोपियों को दोषी करार दिया था। 8 अक्टूबर को न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने दोषी कुलदीप साहू, पूर्व एनएसयूआई जिलाध्यक्ष चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके, फूल सिंह उर्फ रिंकू को फांसी की सजा सुनाई, जबकि चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इन्हें हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी माना था।



