रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम! भारत ने ‘हाइपरसोनिक मिसाइल’ टेक्नोलॉजी पर काम तेज किया

बदलते वैश्विक युद्ध परिदृश्य को देखते हुए भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के विकास पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इस दिशा में Defence Research and Development Organisation (DRDO) लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है, जिससे देश की सैन्य क्षमता और मजबूत हो रही है।
जनवरी 2026 में हैदराबाद में वैज्ञानिकों ने एक्टिव कूल्ड स्क्रैमजेट कम्बस्टर का करीब 12 मिनट तक सफल ग्राउंड टेस्ट किया, जिसे हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे पहले 2025 में ओडिशा से लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण भी किया गया था, जिसकी रेंज 1500 किलोमीटर से अधिक और गति मैक 5 से ऊपर बताई जाती है।
हाइपरसोनिक मिसाइलों की खासियत यह है कि ये बेहद तेज रफ्तार के साथ रडार से बचते हुए लक्ष्य को भेद सकती हैं। आधुनिक युद्धों—जैसे Russia-Ukraine War और मध्य पूर्व के संघर्ष—में ऐसी तकनीक की अहम भूमिका देखी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए DRDO कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें BrahMos-II और Agni-1P जैसे उन्नत सिस्टम शामिल हैं।
आने वाले समय में 2026-27 तक इन हाइपरसोनिक हथियारों को चरणबद्ध तरीके से भारतीय सेना में शामिल करने की योजना है। इससे भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में और मजबूती से खड़ा होगा, जिनके पास अत्याधुनिक हाइपरसोनिक तकनीक मौजूद है।



