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रेल ट्रैक की मजबूती से बढ़ेगी सुरक्षा: रायपुर मंडल में चार महीने में कई बड़े तकनीकी काम

       रायपुर। ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षित परिचालन के पीछे मजबूत रेल ट्रैक की अहम भूमिका होती है। इसी दिशा में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल ने अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच ट्रैक आधारभूत संरचना, संरक्षा, यार्ड सुधार और आधुनिकीकरण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए हैं। इन तकनीकी कार्यों का सीधा उद्देश्य रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और दक्ष बनाना है।

       अप्रैल में मांढर-उरकुरा सेक्शन के मिड लाइन पर ब्रिज क्रमांक 387 के गर्डर की अलाइनमेंट सुधारने का काम पूरा किया गया। इसके साथ ही DD-19 पर रोड अंडर ब्रिज के निर्माण के लिए कट-एंड-कवर पद्धति से बॉक्स इन्सर्शन का कार्य भी पूरा हुआ। फिलहाल RUB के एप्रोच का काम जारी है। इसके पूरा होने के बाद संबंधित लेवल क्रॉसिंग को स्थायी रूप से बंद किया जा सकेगा, जिससे सड़क और रेल दोनों के लिहाज से सुरक्षा बढ़ेगी।

       जून में बिल्हा यार्ड में एक खास तकनीकी उपलब्धि हासिल हुई। पश्चिमी छोर पर प्वाइंट 42B और 41A पर दो थिक वेब स्विच (TWS) लगाए गए। दोनों स्विच 1.5 डिग्री कर्व पर स्थित हैं। रायपुर मंडल में कर्व पर TWS लगाने का यह पहला अवसर है। इससे ट्रैक की मजबूती और यार्ड की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

       जुलाई में मांढर यार्ड के क्रॉस-ओवर क्रमांक 61 की लंबाई में सुधार किया गया, जिससे परिचालन क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है।

       लेकिन इस पूरी कवायद में एक और तकनीकी पहल खास है। 9 जुलाई को GEDO ट्रॉली की कार्यप्रणाली पर मंडल स्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। यह तकनीक ट्रैक का गेज, लेवल और अलाइनमेंट मापने में मदद करती है। टैंपिंग मशीन से काम शुरू करने से पहले इन मापों के आधार पर यह तय किया जाता है कि ट्रैक को कितना उठाना या स्लीव करना है।

       रायपुर मंडल में पहली बार बाहरी एजेंसी की सहायता से इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यानी अब ट्रैक की मरम्मत और सुधार में मशीन से पहले सटीक माप और तकनीकी आकलन पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इससे आने वाले समय में रेल यात्रियों के लिए सुरक्षित और बेहतर रेल परिचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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