विश्वमंच पर सिरमौर भारत की संकल्पना सिद्धि का सशक्त उपक्रम है राष्ट्रीय शिक्षा नीति : उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार

युवाओं के पुरुषार्थ एवं परिश्रम से पुनः विश्वगुरु बनेगा भारत
मंत्री श्री परमार के मुख्य आतिथ्य में जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी भोपाल के 10वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न
743 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, 20 को कुलाधिपति स्वर्ण पदक
भोपाल।
भारतीय परम्परा में शिक्षा के मंदिर केवल उपाधियां देने का माध्यम नहीं बल्कि समाज के विभिन्न पहलुओं में अपना योगदान सुनिश्चित करने वाले श्रेष्ठ नागरिक निर्माण करने का उपक्रम रहे हैं। अतीत के कालखंडों में भारतीय शिक्षा के दर्शन को दूषित करने का कुत्सित प्रयास किया गया लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने, भारत की प्राचीनतम ज्ञान पद्धति को पुनः शिक्षा में समावेश करने का महत्वपूर्ण सौभाग्य प्रदान किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, पूर्वजों के ज्ञान से प्रेरणा लेकर अपने पुरुषार्थ और कौशल से, विश्वमंच पर शक्तिशाली भारत के निर्माण के संकल्प को पूरा करने का सशक्त उपक्रम है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने शनिवार को भोपाल स्थित ‘जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी’ के 10वें दीक्षांत समारोह (कॉन्वोकेशन सेरेमनी) में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता कर कही। मंत्री श्री परमार ने विभिन्न संकायों के प्रतिभावान शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को उपाधियां एवं पदक प्रदान कर, उन्हें बधाई दी और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं प्रेषित की। श्री परमार ने आशा व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि आप अपने ज्ञान का उपयोग न केवल अपने व्यक्तिगत बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी करें और मां भारती के परम वैभव की पुनर्प्राप्ति में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण, ज्ञान आधारित एवं श्रेष्ठ जीवन मूल्यों से परिपूर्ण भारतीय दर्शन के समृद्ध समावेश का महत्वपूर्ण अवसर दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संकल्प को साकार करने में सरकार के साथ समाज की सहभागिता की भी आवश्यकता है। इस संकल्प की सिद्धि में विश्वविद्यालयों का योगदान सुनिश्चित करना होगा, तभी भारत राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के संकल्प को साकार कर सकेगा। मंत्री श्री परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु एवं आत्मनिर्भर बनाने की संकल्पना में हर युवा के पुरुषार्थ एवं परिश्रम की आवश्यकता है। इसके लिए हमें स्वदेशी को अपनाने की भावना को प्रबल करना होगा और भारतीय परिश्रम से बने स्वदेशी उत्पादों को आत्मसात करने की ओर बढ़ना होगा।
मंत्री श्री परमार ने कहा कि भारत के जीवन मूल्य यहां की विशेषता हैं। विश्व एक परिवार है, यह भारत का मूल मंत्र है। विश्वविद्यालयों को भारत के इस मूल मंत्र की रक्षा के भाव से शैक्षिक परिवेश तैयार करने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालयों को, उद्योग जगत की आवश्यकता एवं मांगों के अनुरूप पाठ्यक्रमों तैयार कर, इंडस्ट्री रेडी मानव बल तैयार करने चाहिए। श्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने ध्येय अनुरूप, विद्यार्थियों को मात्र डिग्री प्रदान करना नहीं बल्कि समाज के प्रश्नों का समाधान करने वाले श्रेष्ठ नागरिक निर्माण करना होगा। युवाओं के सहभागी प्रयत्न, पुरुषार्थ एवं परिश्रम से भारत विश्वमंच पर हर क्षेत्र में अग्रणी होगा।
समारोह में भारतीय फैशन डिजाइन परिषद (फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया) के चेयरमैन श्री सुनील सेठी को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से विभूषित किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री हरिमोहन गुप्ता ने शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को दीक्षांत की शपथ दिलाई एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय ने 743 उपाधियां (डिग्री) प्रदान की, इसमें 126 स्नातकोत्तर, 600 स्नातक और 17 पीएचडी उपाधियां शामिल हैं। 20 विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक एवं 18 विद्यार्थियों को उनकी असाधारण योग्यता के लिए रैंक प्रमाण पत्र भी दिए गए।
समारोह में विश्वविद्यालय के उप-कुलाधिपति श्री अभिषेक मोहन गुप्ता एवं कुलगुरु प्रो. नीलांजन चट्टोपाध्याय सहित विश्वविद्यालय परिवार के वरिष्ठ संकाय सदस्य, प्राध्यापक एवं विद्यार्थी और उनके अभिभावक सहित अन्य गणमान्य जन उपस्थित थे। कुलसचिव श्री पंकज दास ने आभार व्यक्त किया।
