सफर में भटकी बिहार की महिला को मिला नया सहारा


सखी वन स्टॉप सेंटर दंतेवाड़ा ने परिवार से कराया सुरक्षित मिलन
रायपुर, अगस्त 2026/ महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर संकट में फंसी महिलाओं के लिए भरोसेमंद सहारा बनकर सामने आ रहा है। दंतेवाड़ा जिले में इसका एक संवेदनशील उदाहरण देखने को मिला, जहां बिहार की एक महिला को सुरक्षित आश्रय देकर उसके परिवार से मिलाया गया।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की रहने वाली श्रीमती सविता देवी अपने मायके से ससुराल जाने के लिए मोतीपुर स्टेशन से ट्रेन में सवार हुई थीं। यात्रा के दौरान वह सो गईं और कई स्टेशनों को पार करते हुए छत्तीसगढ़ के किरंदुल (जिला दंतेवाड़ा) पहुंच गईं। वहां से वह पैदल निकल पड़ीं और भटकते-भटकते भांसी तक पहुंच गईं।
स्थानीय लोगों ने उनकी स्थिति देखकर भांसी थाना को सूचना दी। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित रूप से सखी वन स्टॉप सेंटर, दंतेवाड़ा में अस्थायी आश्रय दिलाया।
सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर और थाना काटी से संपर्क किया। महिला का नाम, पता और फोटो भेजकर पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच के बाद यह पुष्टि हुई कि महिला मुजफ्फरपुर जिले की ही निवासी हैं।
इसके बाद महिला के परिवार से संपर्क किया गया और उन्हें पूरी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही उनके पति दंतेवाड़ा पहुंचे और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद महिला को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया गया।
महिला के पति ने बताया कि उनकी पत्नी की मानसिक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है और वह पिछले करीब डेढ़ महीने से लापता थीं। परिवार ने उन्हें कई स्थानों पर खोजा, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल पाया था। दंतेवाड़ा में पत्नी को सुरक्षित देखकर उन्हें बड़ी राहत मिली।
उन्होंने सखी वन स्टॉप सेंटर, दंतेवाड़ा और महिला एवं बाल विकास विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली मदद ने उनके परिवार को फिर से एक कर दिया।
यह घटना दर्शाती है कि सखी वन स्टॉप सेंटर केवल आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट में फंसी महिलाओं को सुरक्षा, परामर्श, समन्वय और परिवार से पुनर्मिलन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी उपलब्ध कराता है। यह योजना महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की दिशा में सरकार की संवेदनशील पहल का प्रभावी उदाहरण है।



