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छत्तीसगढ़दुर्ग-भिलाई

कुम्हारी में धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस का हुआ भव्य आयोजन — गूंजी जय भीम की गूंज

तथागत म्यूजिकल ग्रुप भिलाई ने दी संगीतमय गीतों की प्रस्तुति

डॉ. अंबेडकर ने दी धम्म को गति – प्रेमलता डोंगरे

       कुम्हारी। भारतीय बौद्ध महासभा कुम्हारी द्वारा बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के धम्म दीक्षा की 69वीं वर्षगांठ पर धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस पंचशील बुद्ध विहार शिवनगर कुम्हारी में मनाया गया।

       सुबह मुख्य अतिथि लेखराम साहू पार्षद वार्ड क्रमांक 9 ने विहार के परिसर में धम्मध्वज फहराकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस पर उपासक/ उपासिकाओं को बधाई दी। उन्होंने डा. अंबेडकर वाचनालय निर्माण के लिए पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। भारतीय बौद्ध महासभा कुम्हारी की ओर से उनको स्मृति चिह्न भेंट देकर सम्मानित किया गया।

       भारतीय बौद्ध महासभा कुम्हारी की अध्यक्ष उपासिका प्रेमलता डोंगरे ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को बुद्ध के धम्म की दीक्षा लेकर अपने लाखों अनुयायियों को दीक्षा दी। इस तरह मानवतावादी धम्म को भारत में गति देने का महत्वपूर्ण कार्य उन्होंने किया।

       सामाजिक कार्यकर्ता सुनील गणवीर ने कहा कि 22 प्रतिज्ञाओं का पालन करने वाला ही असली बौद्ध है। बुद्ध का धम्म वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुरूप है।

       इस अवसर पर सुरेश वाहने ने बाबा साहब अंबेडकर द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने के कारणों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डॉ. अंबेडकर ने सभी धर्मों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही बुद्ध के मार्ग को श्रेष्ठ मानकर धम्म को अपनाया।

       पूर्व अध्यक्ष नरेश खोब्रागड़े ने बाबा साहब के बताए आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।

       संध्याकालीन सत्र में तथागत म्यूजिकल ग्रुप भिलाई का धम्मगीतों और भीम गीतों पर आधारित संगीतमय कार्यक्रम हुआ। गीतों के माध्यम से धनंजय मेश्राम, सुरेश कुमार श्यामकुंवर, आनंद चौव्हाण, संजय मेश्राम, संजय वानखेड़े, शरद वाघमारे, जय कुमार फुलझेले, सुभाष मेश्राम, प्रणाली शणलिंगे, नीतू डोंगरे, अनिता जांबुलकर, सुमिता सुखदेवे, संगीता मेश्राम, उर्वशी वानखेड़े, प्रियंका सिंह, त्रिशाली फुलझेले आदि कलाकारों ने अपनी आवाज़ के जादू से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। ग्रुप के अध्यक्ष अनिल साखरे ने कहा कि हम कलाकार नि: शुल्क सेवा देकर बुद्ध और बाबा साहब डॉ. अंबेडकर के संदेश को गीत-संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुँचा रहे हैं।

       कार्यक्रम के अंत में मैत्री भोज हुआ जिसमें गणमान्य नागरिकों सहित बुद्ध और अंबेडकर अनुयायी शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन किसन बोरकर तथा आभार प्रदर्शन दुर्गा वाहने ने किया।

       कार्यक्रम को सफल बनाने में भारतीय बौद्ध महासभा कुम्हारी के पदाधिकारियों सहित बौद्ध समाज के कार्यकताओं का योगदान रहा।

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