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प्रदेश के 280 आईटीआई परिसरों में एक स्वर में गूंजा राष्ट्र गौरव का गीत वंदे मातरम्

राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मध्यप्रदेश में आज राष्ट्रभक्ति और एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला प्रदेश के सभी 280 शासकीय आईटीआई परिसरों में प्रशिक्षार्थियों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” का सामूहिक गान किया।

प्रदेश के आईटीआई परिसरों में आयोजित सामूहिक गायन कार्यक्रम ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और एकजुटता की भावना को और मजबूत किया। प्रशिक्षार्थियों ने गर्व के साथ स्वर मिलाकर यह संदेश दिया कि “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति समर्पण और आत्मगौरव की भावना का प्रतीक है।

सभी आईटीआई परिसरों में उत्साह और जोश का वातावरण था। प्रशिक्षार्थियों की सामूहिक आवाज़ ने परिसर को गूँजते स्वर और देशभक्ति की ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम ने यह भी दर्शाया कि मध्यप्रदेश की युवा शक्ति केवल कौशल और दक्षता में ही नहीं, बल्कि देश के प्रति अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी में भी तत्पर है।

वंदे मातरम के सामूहिक गायन ने यह संदेश दिया कि भारत की युवा पीढ़ी अपने सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मूल्यों को समर्पण, श्रद्धा और गर्व के साथ आगे बढ़ाने के लिए हमेशा तैयार है। “वंदे मातरम्” का यह कार्यक्रम न केवल भारतीयता की भावना को सशक्त करता है, बल्कि यह युवाओं में एकता, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की शिक्षा भी देता है।

वंदे मातरम् की रचना महान कवि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1874 में की थी। यह गीत मूल रूप से उनकी उपन्यास “आनंद मठ” में शामिल किया गया था। उस समय भारत पर ब्रिटिश शासन था, और देश में स्वतंत्रता की लहर उठ रही थी। इस गीत ने तत्कालीन परिस्थितियों में भारतीयों के भीतर देशभक्ति और एकता की भावना को जगाया और उन्हें संगठित होकर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

वंदे मातरम् गीत की पंक्तियों में मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम, बलिदान और त्याग की भावना का संदेश छिपा है। वंदे मातरम् ने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों को साहस और प्रेरणा दी, बल्कि यह गीत आज भी देश के प्रत्येक नागरिक में मातृभूमि के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध की भावना जगाता है।

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