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मध्य पूर्व में तनाव चरम पर: दोहा हमले के बाद क़तर–इज़राइल टकराव ने पकड़ी रफ्तार

      नई दिल्ली। क़तर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने हाल ही में इज़राइल-गाज़ा संघर्ष को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि “यह युद्ध तुरंत रुकना चाहिए।” उन्होंने संकेत दिया कि इस संघर्ष का वास्तविक लाभ तेल अवीव में बैठे इज़राइली सत्ता प्रतिष्ठान को हो रहा है, न कि तेहरान, वाशिंगटन, डी.सी. या दोहा जैसे अन्य प्रमुख केंद्रों को। उनके इस बयान को क्षेत्रीय भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

       प्रधानमंत्री अल थानी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा संघर्ष, विशेष रूप से गाज़ा में जारी युद्ध, न केवल मानवीय संकट को बढ़ा रहा है बल्कि इससे क्षेत्रीय अस्थिरता भी गहरी हो रही है। उनका मानना है कि इस युद्ध से इज़राइल के आंतरिक राजनीतिक और सुरक्षा एजेंडे को मजबूती मिल रही है, खासकर ऐसे समय में जब इज़राइली नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है।

       यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में दोहा में इज़राइल द्वारा किए गए एक कथित हवाई हमले को लेकर विवाद बढ़ गया। इज़राइल ने इस कार्रवाई को हमास के शीर्ष नेताओं के खिलाफ “सटीक सैन्य कार्रवाई” बताया। इज़राइली पक्ष के अनुसार, ये नेता गाज़ा संघर्ष और हालिया हमलों की रणनीति में शामिल थे, इसलिए उन्हें निशाना बनाना आवश्यक था।

       इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस तरह की कार्रवाइयों को आत्मरक्षा का हिस्सा बताते हुए कहा है कि उनका देश दुनिया के किसी भी हिस्से में छिपे हमास नेतृत्व को निशाना बनाने का अधिकार रखता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि इज़राइल का उद्देश्य नागरिकों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि “आतंकवादी ढांचे” को खत्म करना है।

       दूसरी ओर, क़तर ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन और “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” करार दिया है। क़तर लंबे समय से गाज़ा युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और युद्धविराम तथा बंधक-मुक्ति वार्ताओं में सक्रिय रहा है। ऐसे में उसकी राजधानी पर हमला क्षेत्रीय कूटनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

       अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चिंता जताई गई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ेगा, बल्कि क़तर जैसे रणनीतिक साझेदार देशों के साथ संबंध भी प्रभावित हो सकते हैं।

       हालांकि, क़तर के प्रधानमंत्री के बयान पर इज़राइल की ओर से कोई सीधी और तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसके बजाय इज़राइल ने अपने पुराने रुख़ को ही दोहराया है कि जब तक हमास जैसे संगठनों का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता, तब तक सैन्य अभियान जारी रहेगा। इज़राइल ने अप्रत्यक्ष रूप से कुछ अरब देशों, जिनमें क़तर भी शामिल है, पर हमास को समर्थन देने के आरोप भी दोहराए हैं।

       कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम दर्शाता है कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब केवल इज़राइल और गाज़ा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यापक क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है।

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