परीक्षा, जीवन का निर्धारण नहीं करती बल्कि सतत् सीखने की ओर अग्रसर करती हैं : मंत्री श्री परमार

मनोबल सत्र के समापन अवसर पर, विद्यार्थियों से “परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन” को लेकर किया संवाद
भोपाल।
परीक्षा, जीवन का निर्धारण नहीं करती बल्कि सतत् सीखने की ओर अग्रसर करती हैं। सीखना, मानव जीवन में स्वाभाविक रूप से निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, इसलिए परिणाम को लेकर तनावग्रस्त नहीं बल्कि सतत् सीखते रहने की ओर अग्रसर रहना चाहिए। परीक्षा अवधि के दौरान विद्यार्थी तनाव से मुक्त रहकर, सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ स्वस्थ मन से परीक्षाओं की तैयारी करें, इससे परिणाम भी सकारात्मक ही आयेगा। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों के लिए तनाव प्रबंधन पर आधारित ‘मनोबल सत्र’ के समापन अवसर पर, मंगलवार को भोपाल में मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष से वर्चुअल माध्यम से जुड़कर सहभागिता कर कही। मंत्री श्री परमार ने विद्यार्थियों से “परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन” के संदर्भ में, उनकी जिज्ञासाओं के समाधान के आलोक में सार्थक संवाद कर उनका मनोबलवर्धन किया।
मंत्री श्री परमार ने कहा कि भारतीय परम्परा में एकाग्रता के लिए ‘ध्यान’ का महत्व रहा है। विद्यार्थियों को अपनी दिनचर्या में ध्यान को सम्मिलित करना चाहिए, इससे एकाग्रता बढ़ेगी और सीखने की क्षमता भी बढ़ेगी। मंत्री श्री परमार ने विद्यार्थियों को सुझाव दिया कि किसी भी तरह के तनाव की स्थिति में, अपने से जुड़े किसी भी साथी, परिजन अथवा गुरुजन से संवाद कर अपनी मनोस्थिति साझा करें। संवाद करने से समाधान निकलता है और मन का बोझ कम होता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि सोशल मीडिया का अपनी आवश्यकता अनुरूप ही उपयोग करें, इससे भी मानसिक स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।
मंत्री श्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों में तनाव प्रबंधन के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा काउंसलर्स का प्रबंधन किया जा रहा है। विद्यार्थी, न केवल परीक्षा अवधि के दौरान बल्कि किसी भी अवधि में इनसे परामर्श लेकर मानसिक स्वास्थ्य लाभ ले सकेंगे। मंत्री श्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ, खेल जैसी विविध महाविद्यालयीन गतिविधियों में भी प्रतिभागिता करनी चाहिए, इससे तनाव से दूर रहने में स्वतः सहायता मिलेगी। मंत्री श्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के प्रवेश से लेकर परिणाम तक, विद्यार्थियों के प्रश्नों के समाधान के लिए आवश्यक संवाद के संबंध में सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को निर्देशित किया गया है।
“मनोबल सत्र” कार्यक्रम के समापन सत्र में विषयविद प्रो. विनय मिश्रा ने, “परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया और विद्यार्थियों के तनाव से जुड़े विभिन्न प्रश्नों का समाधान भी सुझाया। प्रो. मिश्रा ने विद्यार्थियों को ओवरथिंकिंग, फेल होने के डर और तुलना करने से बचने को कहा। प्रो. मिश्रा ने विद्यार्थियों को अपना ध्यान, परफेक्शन पर न रखकर प्रोगेस पर रखने का सुझाव दिया। प्रो. मिश्रा ने समय प्रबंधन, स्टडी हैबिट्स, ध्यान, प्राणायाम, तनाव साझा करने और विचार प्रबंधन सहित विभिन्न पहलुओं पर आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
पांच दिवसीय “मनोबल सत्र” कार्यक्रम में, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर आधारित विविध सत्रों में विविध विषयविदों ने, प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को परीक्षा अवधि के दौरान विभिन्न तनावपूर्ण चुनौतियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक सुझाव दिए। उक्त सत्रों का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक दृष्टिकोण, मानसिक दृढता, आत्मविश्वास एवं जीवन कौशल का विकास करना रहा, जिससे वे तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना संतुलित एवं स्वस्थ दृष्टिकोण के साथ कर सकें।
इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ऊषा नायर सहित प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थियों की वर्चुअल उपस्थिति थी।



