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2026 तक स्टॉक खत्म! AI की वजह से 30% तक महंगे हो सकते हैं मोबाइल-लैपटॉप

       (AI) कृत्रिम बुद्धिमत्ता की चमकती दुनिया के पीछे एक ऐसी कहानी भी आकार ले रही है, जो आम उपभोक्ता की जेब पर भारी पड़ सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूख ने वैश्विक तकनीकी बाज़ार में मेमोरी और स्टोरेज का अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। डेटा सेंटर्स की ऊँची-ऊँची इमारतों में गूंजती सर्वरों की आवाज़ अब सिर्फ तकनीकी प्रगति का प्रतीक नहीं, बल्कि उपभोक्ता बाज़ार में आने वाली महंगाई की दस्तक भी बन चुकी है।

       दुनिया भर में AI मॉडल्स को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए भारी मात्रा में DRAM, NAND और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की आवश्यकता हो रही है। परिणामस्वरूप, चिप निर्माता कंपनियां अब अपनी प्राथमिकताएं बदल रही हैं। उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बनने वाली मेमोरी चिप्स का उत्पादन घटाकर उसे AI सर्वरों और क्लाउड कंपनियों की ओर मोड़ा जा रहा है। इसका सीधा असर स्मार्टफोन, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल और टीवी जैसे उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है।

       सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि मशहूर स्टोरेज कंपनी Western Digital का वर्ष 2026 तक का हार्ड ड्राइव उत्पादन अभी से बिक चुका है। कंपनी के बड़े ग्राहक—जिनमें प्रमुख क्लाउड सेवा प्रदाता शामिल हैं—ने लंबी अवधि के अनुबंध कर लिए हैं। ऐसे में खुदरा बाजार के लिए उपलब्ध स्टॉक सीमित रह गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD) की कीमतों में औसतन 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

       केवल हार्ड ड्राइव ही नहीं, बल्कि मेमोरी चिप्स की कीमतों में भी 50 से 60 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया है। AI डेटा सेंटर्स को उच्च प्रदर्शन वाली HBM और DDR5 मेमोरी की जरूरत है। इस कारण DDR3 और DDR4 जैसी पारंपरिक मेमोरी का उत्पादन कम हो गया है। स्मार्ट टीवी निर्माताओं के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, टीवी में इस्तेमाल होने वाली पुरानी मेमोरी की कीमतें 300 से 400 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।

       गेमिंग की दुनिया भी इससे अछूती नहीं है। ग्राफिक्स कार्ड और GPU की कीमतों में तीव्र वृद्धि की आशंका है। मेमोरी की बढ़ती लागत के कारण किसी हाई-एंड ग्राफिक्स कार्ड के बिल ऑफ मटेरियल (BOM) में 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा केवल मेमोरी का हो गया है। परिणामस्वरूप प्रीमियम GPU की कीमतें हजारों डॉलर तक पहुंच सकती हैं। गेमिंग प्रेमियों के लिए यह किसी झटके से कम नहीं।

       पीसी और लैपटॉप बाजार में भी स्थिति गंभीर है। 32GB RAM वाले सिस्टम की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि की चेतावनी दी जा रही है। कुछ ब्रांड्स ने संकेत दिया है कि उन्नत कॉन्फ़िगरेशन वाले लैपटॉप और डेस्कटॉप की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। AI फीचर से लैस नए स्मार्टफोन मॉडल विशेष रूप से महंगे हो सकते हैं, क्योंकि उनमें अधिक मेमोरी और प्रोसेसिंग क्षमता की आवश्यकता होती है।

       इस संकट का प्रभाव केवल उपभोक्ता उपकरणों तक सीमित नहीं है। ऑटोमोबाइल उद्योग, जो पहले ही सेमीकंडक्टर की कमी का सामना कर चुका है, अब नई चुनौतियों से जूझ रहा है। आधुनिक कारें दर्जनों माइक्रोचिप्स और मेमोरी मॉड्यूल पर निर्भर हैं। मेमोरी की कमी से उत्पादन में देरी और कीमतों में वृद्धि संभव है। इसके अलावा टैबलेट्स, वियरेबल डिवाइसेस, ड्रोन, स्मार्ट सिटी सेंसर और यहां तक कि स्मार्ट फ्रिज जैसे घरेलू उपकरण भी प्रभावित हो सकते हैं।

       भारत भी इस वैश्विक परिदृश्य से अलग नहीं है। यहां के उपभोक्ता पहले ही आयातित चिप्स पर निर्भर बाजार का हिस्सा हैं। वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है। हालांकि सरकार की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना और स्थानीय चिप निर्माण की पहल से भविष्य में कुछ राहत की उम्मीद की जा रही है, लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

       विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट अल्पकालिक नहीं है। AI कंपनियां बड़े पैमाने पर मेमोरी और स्टोरेज का भंडारण कर रही हैं, जिससे सामान्य ग्राहकों के लिए उपलब्धता और घट रही है। यदि यही रुझान जारी रहा तो 2027 या 2028 तक तकनीकी बाजार में महंगाई का लंबा दौर देखने को मिल सकता है।

       सवाल यह भी उठता है कि इस स्थिति से उबरने का रास्ता क्या है? कुछ विश्लेषकों का कहना है कि चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने में समय लगेगा, क्योंकि नई फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित करने में अरबों डॉलर और कई वर्ष लगते हैं। जब तक उत्पादन और मांग के बीच संतुलन स्थापित नहीं होता, तब तक कीमतों का दबाव बना रह सकता है।

       इस बीच, उपभोक्ताओं के लिए सलाह यही दी जा रही है कि यदि उन्हें निकट भविष्य में किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की आवश्यकता है, तो खरीदारी में अत्यधिक विलंब न करें। क्योंकि आज की कीमतें कल की तुलना में कम हो सकती हैं। AI की क्रांति जहां नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है, वहीं यह तकनीकी बाजार में एक नया आर्थिक समीकरण भी गढ़ रही है—जहां प्रगति की रफ्तार के साथ-साथ महंगाई की चाल भी तेज हो चली है।

       आखिरकार, यह समय तकनीकी परिवर्तन के साथ-साथ आर्थिक सतर्कता का भी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की यह दौड़ केवल नवाचार की नहीं, बल्कि संसाधनों की भी है—और इस दौड़ में सबसे बड़ी परीक्षा आम उपभोक्ता की जेब की हो रही है।

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