Google Analytics —— Meta Pixel
मध्य प्रदेश

बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन हर गुजरते दिन के साथ और अधिक हिंसक होते जा रहे

ढाका
बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन हर गुजरते दिन के साथ और अधिक हिंसक होते जा रहे हैं। देश भर में कर्फ्यू लगाने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैन्य बलों की तैनाती की घोषणा के बीच 978 भारतीय छात्र घर लौट आए हैं।  एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार  बांग्लादेश के 64 में से 47 जिलों में हुई हिंसा में अब तक कुल 105 लोगों की जान जा चुकी है और 1,500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। समाचार एजेंसी ने झड़पों के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना के एक विदेशी राजनयिक दौरे को रद्द करने की भी खबर दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरक्षण विरोधी हिंसा भड़कने के कुछ दिन बाद शनिवार को पुलिस ने पूरे देश में कठोर कर्फ्यू लागू कर दिया और सैन्य बलों ने राष्ट्रीय राजधानी ढाका के विभिन्न हिस्सों में गश्त की। बांग्लादेश में हिंसा भड़कने से कई लोगों की मौत हुई है जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। शुक्रवार को मरने वाले लोगों की संख्या के बारे में अलग-अलग रिपोर्ट सामने आईं और टीवी के अनुसार 43 लोग मारे गए हैं। ‘एसोसिएटेड प्रेस' के एक संवाददाता ने ढाका मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 23 शव देखे, लेकिन यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो पाया कि क्या उन सभी की मौत शुक्रवार को हुई थी। बृहस्पतिवार को प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा देश में “पूर्ण बंद” लागू करने के प्रयास के दौरान 22 लोगों की मौत हुई थी। मंगलवार और बुधवार को भी कई लोग मारे गए थे। राजधानी ढाका और अन्य शहरों में सड़कों व विश्वविद्यालय परिसरों में पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। अधिकारियों ने मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगा दी है।

मृतकों की संख्या की पुष्टि करने के लिए अधिकारियों से तत्काल संपर्क नहीं हो सका, लेकिन ‘डेली प्रथम आलो' समाचार पत्र की खबर में बताया गया है कि मंगलवार से अब तक 103 लोगों की मौत हुई है। ढाका में अमेरिका के दूतावास ने शुक्रवार को कहा कि खबरों से पता चलता है कि बांग्लादेश में “सैकड़ों से लेकर संभवतः हजारों लोग” घायल हुए हैं। दूतावास ने कहा कि स्थिति “बेहद अस्थिर” है। देश में कर्फ्यू आधी रात से शुरू हुआ। दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक इसमें ढील दी जाएगी ताकि लोग जरूरी सामान खरीद सकें।

इसके बाद रविवार सुबह 10 बजे तक कर्फ्यू फिर से लागू रहेगा। सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी के महासचिव और सांसद उबेद-उल-कादर ने बताया कि उपद्रवियों को “देखते ही गोली मारने” का आदेश जारी किया गया है। प्रदर्शनकारी उस प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं जिसके तहत 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में लड़ने वाले पूर्व सैनिकों के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जाता है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह प्रणाली भेदभावपूर्ण है और प्रधानमंत्री शेख हसीना के समर्थकों को लाभ पहुंचा रही है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पार्टी ने मुक्ति आंदोलन का नेतृत्व किया था। छात्र चाहते हैं कि इसे योग्यता आधारित प्रणाली में तब्दील किया जाए। वहीं हसीना ने आरक्षण प्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि युद्ध में भाग लेने वालों को सम्मान मिलना चाहिए भले ही वे किसी भी राजनीतिक संगठन से जुड़े हों।  

 

The post बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन हर गुजरते दिन के साथ और अधिक हिंसक होते जा रहे first appeared on Pramodan News.

Related Articles

Back to top button