पीएम ई-ड्राइव योजना: पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से तौबा-तौबा,इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल, पढ़िए ताज़ा आंकड़े

- इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन ( e-2W) की बिक्री 2024-25 में बढ़कर 5,71,411 यूनिट हो गई है।
सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दाम से परेशान लोग अब इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ रुख कर रहे हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल इसकी गवाही दे रहा है। सरकार की ओर से जारी ताज़ा आंकड़ों से पता चलता है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री के लिए शुभ संकेत है।
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1 अक्टूबर 2024 से लागू हुई ‘पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव)’ योजना 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी। हाल ही में इस योजना को कैबिनेट ने 10,900 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी।
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इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने में तेजी लाना, आवश्यक चार्जिंग बुनियादी ढांचे का विकास करना और पूरे देश में एक मजबूत ईवी विनिर्माण तंत्र स्थापित करना है।
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इस योजना के तहत, इलेक्ट्रिक वाहन की बिक्री में पहले से ही रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है, जो ईवी वाहनों को अपनाने की बढ़ती रफ्तार को दर्शाता है।
ईवी खरीद के लिए अग्रिम प्रोत्साहन
पीएम ई-ड्राइव पहल, सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों का समर्थन करते हुए बड़े पैमाने पर गतिशीलता को बढ़ावा देती है। इसका मुख्य उद्देश्य ईवी खरीद के लिए अग्रिम प्रोत्साहन की पेशकश और चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विकास को आगे बढ़ाते हुए, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना है।
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पर्यावरणीय प्रभाव कम और वायु गुणवत्ता में सुधार
इस योजना के ज़रिए आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप एक कुशल और प्रतिस्पर्धी ईवी विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए परिवहन से संबंधित पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने की कोशिश की गई है। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और ईवी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए इसे एक चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) के ज़रिए पूरा किया जाएगा।
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पीएम ई-ड्राइव योजना: मुख्य बिंदुओं के आधार पर क्रियान्वयन
सब्सिडी:
ई-2 पहिया वाहन (ई-2डब्ल्यू), ई-3 पहिया वाहन (ई-3डब्ल्यू), ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक और ईवी की अन्य उभरती श्रेणियों जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन की मांग।
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पूंजीगत संपत्ति बनाने के लिए अनुदान:
इलेक्ट्रिक बसों (ई-बसों) के अधिग्रहण, चार्जिंग स्टेशनों के एक व्यापक नेटवर्क की स्थापना और भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) परीक्षण सुविधाओं के उन्नयन के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियों समेत योजनाओं का प्रशासन और परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) के लिए शुल्क।
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ई-वाहनों की बिक्री में उछाल
भारी उद्योग मंत्रालय इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए राष्ट्रव्यापी प्रयास का नेतृत्व कर रहा है, जिसका मकसद वर्ष 2070 के लिए भारत के महत्वाकांक्षी नेट-शून्य लक्ष्य में योगदान देना है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम (ईएमपीएस) और पीएम ई-ड्राइव योजनाओं जैसी पहलों की वजह से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन ( e-2W) की बिक्री 2024-25 में बढ़कर 5,71,411 यूनिट हो गई है।
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इसी अवधि के दौरान, ई-रिक्शा और ई-कार्ट सहित इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (ई-3डब्ल्यू) की बिक्री 1,164 यूनिट तक पहुंच गई, जबकि एल5 श्रेणी में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की बिक्री 71,501 यूनिट तक पहुंच गई।
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