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छत्तीसगढ़ मुक्त्ति मोर्चा पुलिस की गोली से मारे गये 17 श्रमिको की याद में 1 जुलाई को मनायेगा शहीद दिवस

श्रमिक विरोधी कानूनों के विरोध में 9 जुलाई को सभी राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा देशव्यापी हड़ताल में छ.मु.मोर्चा भी होगा शामिल

भिलाई-श्रस कानून का पालन कराने तथा जीने लायक वेतन आदि की मांगो को लेकर श्रमिक छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में शांति पूर्वक आंदोलन कर रहें थे।उन मांगों को पूरा कराने के बजाय भाजपा की पटवा सरकार द्वारा 1 जुलाई 1992 के दिन पुलिस द्वारा गोली चालन कराया गया। जिसमे 17 मजदूर शहीद हुए थे।उनकी याद में,शहीद दिवस प्रतिवर्षानुसार की भांति इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा समन्वय समिति के नेतृत्व में भिलाई पावर हॉउस में 1 जुलाई,2025 दिन मंगलवार,को आयोजित किया गया है।

इस आयोजन में शामिल होने भिलाई,दुर्ग,रायपुर,बिलासपुर,दल्लीराजहरा,राजनादगांव,डोंगरगढ़,कवर्धा,पंडिरया,बालोद आदि स्थानों से मजदूर, किसान व समर्थकगण सुबह 10 बजे छावनी लाल मैदान मे एकत्रित होंगे। वहाँ से दोपहर 12 बजे शहीद के परिवारों के साथ गोलीकांड घटना स्थल भिलाई पावर हॉउस रेल्वे स्टेशन पहुंचकर शहीदों के छायाचित्रो पर मल्यार्पण करेंगे उसके पश्चात वहां से रैली निकली जायेगी। रैली छावनी चौक से होकर,ए.सी.सी.चौक पहुंचकर शहीद शंकरगुहा नियोगी की प्रतिमा पर मल्यार्पण कर श्रदांजलि देने के पश्चात् वहां सभा आयोजित होगी।सभा को छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा सहित अनेक जनसंगठनों के प्रतिनिधि सम्बोधित करेंगे ।

पत्रकार वार्ता में छ.मु.मोर्चा के प्रतिनिधियों ने बताया कि 44 श्रम कानूनों को केंद्र की मोदी सरकार द्वारा समाप्त कर उद्योगपति कारपोरेट घरानो के हितो के लिए 4 श्रम कोड बनाये गये है। जिसमे 8 घंटे ड्यूटी को 12 घंटे किया गया है,जिसके विरोध में 9 जुलाई को सभी राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा देशव्यापी हड़ताल का आव्हान किया गया है, जिसमे छ.मु.मोर्चा भी सभी मजदूर संगठनों के साथ 9 जुलाई को होने वाली हड़ताल मे शामिल होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का श्रम विभाग उद्योगपती,ठेकेदारों का रक्षा कवच बन गया है।असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन नही दिया जा रहा है।मेहनत कश वर्ग महँगाई से त्रस्त है। श्रम विभाग के अधिकारियो द्वारा उद्योगो मे जाँच की जाती थी,उस पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रोक लगा दी गयी है,श्रम विभाग को पंगू बना दिया गया है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि 4 श्रमकोड को छत्तीसगढ़ मे लागू ना किया जाये तथा श्रम निरीक्षकों को उद्योगो मे जाँच करने के आदेश जारी किया जाए।

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