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प्रदेश में सिंचाई के रकबे में हो रही है निरंतर वृद्धि : जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट

माइक्रो सिंचाई पद्धति में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य

जल संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये म.प्र. को मिला राष्ट्रीय जल अवार्ड

जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की किसानों की खुशहाली की परिकल्पना अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश में गत दो वर्षों में सिंचाई क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। किसानों की तरक्की और खुशहाली हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कृषि के अतिरिक्त पेयजल, उद्योगों, विद्युत उत्पादन आदि के लिए जल की उपलब्धता कराये जाने हेतु प्रयासरत हैं। प्रदेश में सिंचाई के रकबे में निरंतर वृद्धि हो रही है। माइक्रो सिंचाई पद्धति में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य है। जल संरक्षण एवं संवर्धन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये म.प्र. को राष्ट्रीय जल अवार्ड मिला है। यह जानकारी जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने मंगलवार को 2 वर्ष की विभागीय उपलब्धियों पर आयोजित पत्रकारवार्ता में दी। अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा उपस्थित थे।

मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि यहां स्व. प्रधानमंत्री युगदृष्टा श्री अटल बिहारी वाजपेई के नदी जोड़ो के सपने को साकार करने का कार्य प्रारंभ हुआ। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने केन-बेतवा बहुउद्देशीय नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना का प्रदेश में शुभारंभ किया। इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर एवं तकदीर बदल जाएगी। हमारे राज्य को उक्त परियोजना से न केवल सिंचाई अपितु पेयजल एवं विद्युत उत्पादन का लाभ भी मिलेगा।

प्रदेश की दूसरी महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजना है संशोधित पार्वती – कालीसिंध -चंबल लिंक राष्ट्रीय परियोजना। इससे प्रदेश के बड़े हिस्से में सिंचाई, पेयजल, उद्योगों आदि के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो सकेगा।

मध्यप्रदेश में आकार ले रही तीसरी महत्वपूर्ण परियोजना तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना है, जो कि विश्व में अपने आप में एक बहुत अनूठा प्रयास है। तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना अंतर्गत वर्षा के दौरान तापी नदी के अतिरिक्त जल को नियंत्रित तरीके से भू-जल भरण के लिए उपयोग किया जाकर भू-जल स्तर में वृद्धि की जाएगी। परियोजना के क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र राज्यों के मध्य 10 मई 2025 को सहमति बनी।

मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि हमारे लिए हमारे बांधों की सुरक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। बांधों की सुरक्षा के लिये बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 के प्रावधानों को लागू करने के लिये विशेषज्ञ समिति का गठन करने वाला मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी राज्य है। बांधों की सुरक्षा के लिये ड्रिप परियोजना के अंतर्गत विश्व बैंक के सहयोग से आगामी 5 वर्षों में विभिन्न बांधों की मरम्मत के कार्य कराये जायेंगे।

जल संसाधन मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। सिंचाई प्रबंधन में मध्यप्रदेश देश में सर्वोच्च स्थान पर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में हमारा प्रदेश विकसित राज्य बनने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।

सिंहस्थ-2028

मंत्री श्री सिलावट ने बताया कि उज्जैन शहर पवित्र मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर बसा है। उज्जैन शहर का पौराणिक और धार्मिक महत्व है। प्रत्येक 12 वर्ष में क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर सिंहस्थ (कुंभ) पर्व पर मेला का आयोजन होता है। सिंहस्थ 2028 से संबंधित सभी कार्यों (कुल राशि रू. 02 हजार 396 करोड़) की स्वीकृति समय सीमा में प्राप्त कर, सिंहस्थ 2028 के पूर्व दिसंबर 2027, तक पूर्ण किया जाना लक्षित है।

सिंहस्थ 2028 के आयोजन हेतु क्षिप्रा नदी को निर्मल-अविरल एवं निरंतर प्रवहमान बनाकर श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुरूप मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विभिन्न धार्मिक पर्वो पर अनुष्ठान हेतु पर्याप्त स्वच्छ जल उपलब्ध कराये जाने के लिये विभाग द्वारा विभिन्न कार्य कराये जा रहे हैं।

1. उज्जैन जिले की कान्ह नदी पर कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना (क्षिप्रा शुद्धीकरण)

  • लागत राशि रू. 919.94 करोड़

  • अनुबंधित राशि रू. 866.37 करोड़

  • कट एण्ड कवर की लंबाई 18.15 किलोमीटर

  • खुदाई कार्य 9.5 किलोमीटर में प्रगतिरत

  • लेइंग कार्य 2.5 किलोमीटर में पूर्ण शेष प्रगतिरत

  • टनल की लंबाई 12 किलोमीटर

  • खुदाई कार्य 6.35 किलोमीटर में पूर्ण शेष प्रगतिरत

  • भू अर्जन की स्थिति (शासकीय 12.9 हेक्टेयर, निजी 2.49 हेक्टेयर) पूर्ण

  • कार्य पूर्ण करने की तिथि सितम्बर 2027

2. उज्जैन जिले की सेवरखेडी-सिलारखेडी मध्यम सिंचाई परियोजना (नदी एवं जल निकायों का विकास)

  • लागत राशि रू. 614.53 करोड़।

  • परियोजना के तहत उज्जैन जिले के ग्राम सेवरखेड़ी में क्षिप्रा नदी पर बैराज का निर्माण कर पम्पिंग के माध्यम से प्रस्तावित सिलारखेडी जलाशय में जल एकत्रित कर आवश्यकता अनुसार क्षिप्रा नदी में प्रवाहित किया जायेगा।

  • परियोजना से उज्जैन शहर को पेयजल एवं विभिन्न धार्मिक पर्वो पर श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुरूप निर्मल अविरल जल उपलब्ध कराया जायेगा। कार्य आरंभ कर वर्ष 2027 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है।

  • अनुबंधित राशि रू. 445.40 करोड़

3. क्षिप्रा नदी के दोनों किनारों पर 30 किलोमीटर घाट निर्माण

लागत रू. 778.91 करोड।

  • अनुबंधित राशि रू. 563.28 करोड़

  • भू-अर्जन की स्थिति (शासकीय भूमि 12.71 हेक्टेयर, निजी भूमि 36.99 हेक्टेयर)

  • घाट की कुल लंबाई 29.21 किलोमीटर

  • खुदाई कार्य 18.6 किलोमीटर में प्रगतिरत।

  • सीमेंट कॉकीट कार्य 4.3 किलोमीटर में प्रगतिरत।

  • कार्य आरंभ कर नबम्बर 2027 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है।

  • प्रतिदिन लगभग 5 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर सकेंगे।

4. क्षिप्रा नदी पर जल संसाधन विभाग द्वारा 09 बैराज का निर्माण (उज्जैन जिले में 01, इंदौर जिले में 01 एवं देवास जिले में 07 बैराज) एवं नगर निगम उज्जैन द्वारा कालियादेह स्टॉप डेम का मरम्मत कार्य।

5. कान्ह नदी पर 11 बैराजों (उज्जैन जिले में 05 एवं इंदौर जिले में 06) का निर्माण कार्य।

कुल लागत 84.78 करोड़, कुल 21 बैराज सिंचाई 02 हजार 19 हेक्टेयर

केन-बेतवा राष्ट्रीय परियोजना

  • लागत – 44 हजार 605 करोड़

  • सिंचाई 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर

  • बुन्देलखण्ड के 10 जिले (छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ, निवाडी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर) लगभग 2 हजार ग्रामों के 7 लाख 25 हजार किसान परिवार लाभान्वित ।

  • पेयजल 44 लाख आबादी

  • विद्युत 103 मेगावॉट (जल विद्युत) 27 मेगावॉट (सौर उर्जा)

  • भू-जल की स्थिति में सुधार, औद्योगीकरण, पर्यटन एवं रोजगार के अवसर में वृद्धि।

  • त्रिपक्षीय समझोता ज्ञापन 22.03.2021

  • भारत सरकार द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति – 22.12.2021

  • मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति 15.03.2024

  • दौधन बांध का भूमि पूजन प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा खजुराहो में 25 दिसम्बर 2024 को किया गया।

पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय परियोजना

  • लागत 72 हजार करोड़ (मध्यप्रदेश 35 हजार करोड़)

  • सिंचाई मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 13 जिले (गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर मालवा, शाजापुर, श्योपुर, ग्वालियर एवं भिण्ड) में 6.16 लाख हेक्टेयर में नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिण्ड, मुरैना एवं श्योपुर के 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा।

  • लगभग 2 हजार 94 ग्रामों की 40 लाख आबादी लाभान्वित होगी।

  • मध्यप्रदेश की 19 सिंचाई परियोजनायें इसमें शामिल की गई हैं।

  • 28 जनवरी 2024 को मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं केन्द्र के मध्य त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) हस्ताक्षरित ।

  • 17 दिसम्बर 2024 को जयपुर में अनुबंध सहमति पत्र (एम.ओ.ए.) हस्ताक्षरित प्रधानमंत्री श्री मोदी की उपस्थिति में हुआ।

  • अन्तर्राज्यीय परियोजना होने के कारण जल आंकलन केन्द्रीय जल आयोग, नई दिल्ली के अधीन परीक्षणाधीन ।

मेगा तापी रीचार्ज परियोजना

  • मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के मध्य।

  • कुल लागत 19 हजार 244 करोड़

  • सिंचाई बुरहानपुर एवं खण्डवा जिले की 1 लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र।

  • पारंपरिक जल भंडारण के स्थान पर भू-गर्भ जल पुनः भरण योजना।

  • 10 मई 2025 को महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के मध्य राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्मित किये जाने की सहमति प्रदान की गई।

डैम सेफ्टी रिव्यू पैनल

  • बांधों की सुरक्षा के लिये डैम सेफ्टी रिव्यू पैनल का गठन। ड्रिप-॥ परियोजना के तहत 5 वर्षों में 27 बांधों की सुरक्षा एवं मरम्मत की जावेगी। जिसके लिये विश्व बैंक द्वारा 186 करोड की स्वीकृति प्रदान की गई है। 3 बांधों पर कार्य प्रगतिरत है।

अटल भू-जल योजना

  • अटल भू-जल योजना से भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के 06 जिलों (सागर- दमोह छतरपुर- टीकमगढ़-पन्ना एवं निवाडी) के 09 विकासखंडों (सागर-पथरिया-छतरपुर – नौगाव-राजनगर-पलेरा-बलदेवगढ अजगढ़ एवं निवाडी) की 670 ग्राम पंचायत क्षेत्रों में जन सहभागिता से जल सुरक्षा योजना तैयार करने हेतु भारत सरकार की सहायता से 314.44 करोड़ राशि की योजना 2020 से अक्टूबर 2025 तक क्रियान्वित की गई।

जल गंगा संवर्धन अभियान

  • जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत 30 मार्च 2025 से 30 जून 2025 तक संपूर्ण प्रदेश में तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो तथा घाट आदि के मरम्मत का कार्य, बांध, नहरों, बावड़ी एवं नदियों को अतिक्रमण मुक्त करना, साफ-सफाई एवं जमी हुई मिट्टी/सिल्ट को हटाना, विभिन्न संरचनाओं में लगे गेटों के मरम्मत के कार्य किये गये।

दो वर्षों की उपलब्धियाँ

  • रबी 2023-24 की तुलना में रबी 2025-26 में 7 लाख 31 हजार हेक्टेयर नवीन सिंचाई क्षमता का सृजन। (जल संसाधन – 3.79 लाख हेक्टेयर, नर्मदा घाटी विकास हेक्टेयर) 3.52 लाख

  • 16.87 लाख हेक्टेयर नवीन सिंचाई हेक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति जारी।

  • केन बेतवा अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना भी राज्य शासन द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति राशि रु 24.293.24 करोड़ 15 मार्च 2024 को जारी।

  • प्रभावित 6017 हे. वन भूमि (स्टेज 1 एवं स्टेज 2 स्वीकृत) एवं समतुल्य गैर राजस्व वन भूमि का हस्तातरण पूर्ण।

  • दौधन बाँध का निर्माण कार्य प्रारंभ ।

  • 22 प्रभावित ग्रामों के भू-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन हेतु विशेष के तहत अवार्ड पारित ।

  • संशोधित पार्वती कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना की राज्य सरकार द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति राशि रू. 34,411.78 करोड़ दिनांक 31 दिसम्बर 2024 को जारी।

  • 20 परियोजनाओं की डी.पी.आर. (सी.एस.आर. दिनांक 15.07.2024) तैयार कर केंन्द्रीय जल आयोग को प्रस्तुत ।

  • केंन्द्रीय जल आयोग के E-PAM Portal पर समस्त डी.पी.आर. के प्रस्तुतिकरण की कार्यवाही पूर्ण।

  • शासन द्वारा एकमुश्त जलकर बकाया पर शास्ति माफ

  • 25 वर्षों पश्चात एकमुश्त बकाया जल कर राशि जमा करने पर अधिरोपित शास्ती (दाण्डिक ब्याज रू. 84.17 करोड़) माफ करने का निर्णय। 35 लाख किसान लाभान्वित ।

  • प्रदेश में संचालित समस्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं की सिचाई क्षमता के विरूद्ध 100 प्रतिशत वास्तविक सिंचाई अर्जित।

आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना

वर्ष 2026 में पूर्ण होने वाली वृहद सिंचाई परियोजनाएं

स.क्र.

परियोजना का नाम

सैंच्य क्षेत्र (हे.)

1.

कयामपुर सीतामऊ सिंचाई परियोजना (मंदसौर)

112,000

2.

बंडा परियोजना यूनिट 2 (सागर और छतरपुर)

80,000

3.

रामपुरा-मनासा सिंचाई परियोजना (नीमच)

67,186

4.

सुठालिया सिंचाई परियोजना (राजगढ़)

49,800

5.

पार्वती परियोजना (राजगढ़, भोपाल एवं सीहोर)

48,000

6.

मल्हारगढ़ सूक्ष्म सिंचाई परियोजना (मंदसौर)

46,500

7.

त्यौंथर बहाव योजना (रीवा)

43,450

8.

हनौता सिंचाई परियोजना (सागर एवं विदिशा)

40,000

9.

रिहन्द सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना (सिंगरौली)

38,000

10.

पंचमनगर सिंचाई परियोजना (दमोह/सागर)

25,000

11.

कोठा बैराज परियोजना (विदिशा)

22,272

12.

पेंच माइक्रो परियोजना काम्पलेक्स-2 (छिंदवाड़ा)

19,600

13.

भन्नी सूक्ष्म दवाब सिंचाई परियोजना (शहडोल)

18,300

14.

घोघरी परियोजना (बैतूल)

11,987

योग

6,22,095

वर्ष 2027 में पूर्ण होने वाली वृहद सिंचाई परियोजनाएं

स.क्र.

परियोजना का नाम

सैच्य क्षेत्र (हे.)

1

बीना संयुक्त सिंचाई परियोजना (सागर)

96,000

2

सेवरखेडी-सिलारखेडी परियोजना (उज्जैन)

NA

कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना (उज्जैन)

NA

योग

96,000

वर्ष 2028 में पूर्ण होने वाली सिंचाई परियोजनाएं

स.क्र.

परियोजना का नाम

सैच्य क्षेत्र (हे.)

1

लोअर-ओर परियोजना (शिवपुरी एवं दतिया)

110,400

2

चेंटीखेडा वृहद सिंचाई परियोजना (मुरैना)

15,300

3

मूंझरी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना (श्योपुर)

11,575

योग

1,37,275

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