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संसद मार्च पर बवाल: पुलिस की सख्ती के बीच प्रदर्शनकारियों से झड़प, सरकार पर बढ़ा सियासी दबाव

       नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए “चलो संसद” मार्च के दौरान उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग पार कर संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर है, जबकि क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

       यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक युवा-नेतृत्व वाले आंदोलन द्वारा आयोजित किया गया था। आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, कथित NEET-UG परीक्षा अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन में देशभर से बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

       इस आंदोलन को नई गति तब मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की। 20 दिन से अधिक समय तक अनशन के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, लेकिन उन्होंने अस्पताल से भी अपना विरोध जारी रखने की बात कही।

       घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार भी सक्रिय हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित वरिष्ठ मंत्रियों के साथ लंबी बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। वहीं भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगें सुनीं। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

       यह आंदोलन अब केवल एक परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं के बीच शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और रोजगार जैसे व्यापक मुद्दों का प्रतीक बनता जा रहा है। विपक्षी दलों ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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