राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता खत्म करो’ बयान के बाद सोशल मीडिया पर नया सवाल, प्रियंका गांधी को लेकर छिड़ी बहस

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘स्मैश द पेट्रिआर्की’ यानी पितृसत्ता को खत्म करने वाले बयान के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस ने नया मोड़ ले लिया है। बयान के समर्थन और विरोध के बीच अब कुछ यूजर्स कांग्रेस की राजनीति में प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
दरअसल, अगस्त 2026 में पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं के अधिकार और समानता की बात करते हुए पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने का आह्वान किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर मीम्स, वीडियो और राजनीतिक टिप्पणियों की बाढ़ आ गई।
इसी बहस के बीच एक सवाल तेजी से उछाला जाने लगा—अगर पितृसत्ता को चुनौती देनी है, तो इसकी शुरुआत राजनीति में अपने घर और अपनी पार्टी से क्यों न हो? कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का तर्क है कि कांग्रेस को प्रियंका गांधी को स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व के तौर पर आगे बढ़ाना चाहिए। यहां तक कि कुछ लोग इसे मजाकिया अंदाज में ‘पिंजरा तोड़ो’ और महिला सशक्तिकरण से जोड़ रहे हैं।
प्रियंका गांधी को लेकर यह चर्चा पूरी तरह नई भी नहीं है। उनके सक्रिय राजनीति में आने और वायनाड से सांसद बनने के बाद समय-समय पर सोशल मीडिया पर उन्हें कांग्रेस के संभावित बड़े नेतृत्व चेहरे के रूप में पेश किया जाता रहा है। फरवरी 2026 में कामाख्या देवी मंदिर के बाहर उन्हें प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद दिए जाने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा था।
हालांकि, जमीनी राजनीतिक तस्वीर सोशल मीडिया के नैरेटिव से अलग है। प्रियंका गांधी ने सार्वजनिक रूप से कई मौकों पर राहुल गांधी के नेतृत्व का समर्थन किया है और उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए सक्षम नेता बताया है। कांग्रेस या प्रियंका गांधी की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि वह स्वयं को प्रधानमंत्री पद की दावेदार घोषित करने जा रही हैं।
ऐसे में फिलहाल ‘प्रियंका बनाम राहुल’ की चर्चा ज्यादा सोशल मीडिया की बहस, राजनीतिक कटाक्ष और मीम्स का हिस्सा नजर आती है, न कि कांग्रेस की घोषित रणनीति।