स्कूलों में बदलेगा अटेंडेंस का तरीका, OMR शीट से होगी हाजिरी, AI करेगा गैरहाजिर और कमजोर बच्चों की पहचान

रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग अब पूरी तरह डिजिटलाइजेश के दौर से गुजर रहा है। शिक्षकों व कर्मचारियों के ऑनलाइन अटेंडेंस के बाद अब स्कूली बच्चों का अटेंडेंस भी ऑनलाइन किया जा रहा है। OMR शीट पर बच्चों का अटेंडेंस दर्ज होगा। कोर्स कितना पूरा हुआ, पढ़ाइ में कितने बच्चे गैरहाजिर रहे और कौन बच्चा कमजोर है,एआई निगरानी करेगा। यह सिस्टम विभाग ने लागू कर दिया है।
स्कूलों में बच्चों की हाजिरी और पढ़ाई कितनी हुई, अब इसकी जानकारी सिर्फ स्कूल की फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी। शिक्षा विभाग पहली बार इसका रिकॉर्ड मुख्यालय स्तर पर जुटाने की तैयारी कर रहा है।
नई व्यवस्था पर नजर डालें तो अब बच्चों की हाजिरी, रजिस्टर की जगह OMR शीट में दर्ज होगी और महीनेभर का रिकॉर्ड एप पर अपलोड होते ही मुख्यालय के कंट्रोल रूम में पहुंच जाएगा। प्रत्येक स्कूल में सप्ताह और महीने के हिसाब से विषयवार कितना कोर्स हुआ, इसका रिकॉर्ड भी ऑनलाइन भेजा जाएगा। कुछ स्कूलों में इसका शुरुआत कर दी गई है। हर तीन महीने में इसी डेटा के आधार पर समीक्षा होगी और एआई की मदद से लगातार गैरहाजिर बच्चों तथा कोर्स में पीछे चल रहे स्कूलों की पहचान की जाएगी।
पुरानी व्यवस्था पर नजर डालें तो बच्चों की हाजिरी स्कूल स्तर पर ही दर्ज होती है। संस्था प्रमुख के पास यह जानकारी रहती है कि कौन बच्चा कितने दिन स्कूल आया, लेकिन मुख्यालय तक इसकी नियमित और एक जगह पर उपलब्ध जानकारी नहीं पहुंचती। विभाग अब पुरानी व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रहा है।
नई व्यवस्था के मद्देनजर अब हर तीन महीने में बच्चों के स्कूल में अटेंडेंस की समीक्षा मुख्यालय स्तर पर होगी। एआई की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी, बीते तीन महीनों में कितने बच्चे अनुपस्थित रहे हैं। इसके बाद ऐसे बच्चों को चिह्नित कर शिक्षकों को उनके घर भेजकर स्कूल से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
स्कूलों में अध्ययन अध्यापन पर अब मुख्यालय की सीधी नजर रहेगी। इसके लिए अलग फार्मेट बनाया जा रहा है, जिसमें स्कूलों को सप्ताह और महीने के हिसाब से विषयवार बताना होगा, कितना कोर्स पूरा हुआ और कितना बाकी है। यह जानकारी भी एप के जरिए मुख्यालय भेजी जाएगी। इससे हर तीन महीने में स्कूलवार और विषयवार समीक्षा करेंगे।
शिक्षा विभाग अब इससे भी आगे की व्यवस्था पर मंथन कर रहा है। योजना है कि स्कूलों में ऐसा डिवाइस लगाया जाए जो कक्षा की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सके। खासतौर पर शिक्षक कक्षा में क्या और कैसे पढ़ा रहे हैं, इसका वॉयस रिकॉर्ड तैयार हो और उसे ऑनलाइन सिस्टम के जरिए मुख्यालय तक भेजा जा सके। इससे अफसरों को यह जानने का मौका मिलेगा कि शिक्षक का पढ़ाने का तरीका क्या है और कक्षा में वास्तव में पढ़ाई किस तरह हो रही है। हालांकि यह व्यवस्था अभी शुरुआती विचार के स्तर पर है।



