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भिलाई स्टील प्लांट में फर्जीवाड़ा जारी, मजदूरों को चाहिए लीव कार्ड और AWA का पूरा पैसा

  • अधिकांश ठेका कंपनियां अभी भी  3700 रुपए वास्तविक रूप से ठेका श्रमिकों को वेतन के साथ नहीं दे रहे हैं।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील ठेका श्रमिक यूनियन इंटक की कार्यकारिणी की बैठक में भिलाई इस्पात संयंत्र के ठेका मजदूरों का दर्द एक बार फिर छलका। अध्यक्ष संजय साहू की मौजूदगी में मजदूरों ने एक-एक पोल खोली। उत्पादन में 70% की भागीदारी के रूप में कार्य करने वाले एवं लगातार लाभार्जन में योगदान देने वाले ठेका श्रमिकों की समस्या को लेकर चर्चा की गई।

विभिन्न विभागों के ठेका श्रमिकों ने कार्यकारिणी में अपनी समस्या एवं मांग रखी। उपाध्यक्ष मनोहर लाल ने बताया कि सेल द्वारा बीएसपी के ठेका श्रमिकों को एडब्ल्यूए के रूप में 3700 प्रतिमाह दिया जा रहा है। लेकिन अधिकांश ठेका कंपनियां अभी भी  3700 रुपए वास्तविक रूप से ठेका श्रमिकों को वेतन में नहीं दे रहे हैं।

यूनियन की मांग पर प्रबंधन द्वारा इंजीनियरिंग एस्टीमेट में ठेका पद्धति सुधार कर ठेका दिया जा रहा है। वहां, पर बीएसपी प्रबंधन द्वारा ऑपरेटिंग अथॉरिटी द्वारा यह सुनिश्चित करें कि पूर्ण रूप से 3700 एडब्ल्यूए की राशि दिया जाए।

ठेका श्रमिकों को मिले लीव कार्ड एवं वेतन पर्ची

बीएसपी के ठेका श्रमिकों को नियमत: 20 दिन में एक ईएल दिया जाता है। चार राष्ट्रीय अवकाश पर कार्य करने पर अतिरिक्त वेतन दिया जाता है। लेकिन अधिकांश ठेका कंपनी ठेका श्रमिकों द्वारा छुट्टी लेने पर उनको अनुपस्थित कर वेतन काट दिया जाता है। राष्ट्रीय अवकाश के दिन कार्य करने पर अतिरिक्त वेतन नहीं दिया जाता। श्रमिकों को वेतन पर्ची नहीं मिलने से उनको मिलने वाली वेतन की पूर्ण जानकारी नहीं हो पाती। कितना पीपीएफ एवं ईएसआईसी काटा है, उसकी भी जानकारी नहीं होती। बीएसपी प्रबंधन सुनिश्चित करे कि ठेका श्रमिकों को लीव कार्ड एवं वेतन पर्ची उपलब्ध करवाए।

ठेका श्रमिकों को दुर्घटना बीमा-ईएसआईसी की कॉपी उपलब्ध कराएं

ठेका श्रमिकों को 10 लाख की दुर्घटना बीमा होने की जानकारी नहीं हो पाती। उन्हें पता नहीं चलता कि उनका दुर्घटना बीमा हुआ है कि नहीं। और हुआ है तो कब तक। इसी प्रकार  ईएसआईसी मे परिवार का पंजीयन की जानकारी नहीं होने के कारण ईएसआईसी हॉस्पिटल में इलाज नहीं करवा पाते।

ठेका श्रमिकों का गेट पास बनने के 30 दिन पहले हो मेडिकल
ठेका श्रमिकों को मेडिकल फिटनेस होने के बाद गेट पास बनाया जाता है। अनफिट होने से उन्हें इलाज कराकर फिट करवाने में 15 दिन का समय लगता है। लेकिन वर्तमान में उनका मेडिकल गेट पास बनने के एक-दो दिन पहले ही होता है, जिसके कारण उन्हें फिट होकर गेट पास बनवाने में 15 दिन से अधिक समय लग जाता है। इसलिए बोकारो स्टील प्लांट की तरह भिलाई में भी गेट पास बनने के 30 दिन पहले मेडिकल फिटनेस किया जाए।

मजदूरों की लड़ाई का दिख रहा असर

चर्चा उपरांत अध्यक्ष संजय साहू ने कहा कि ठेका श्रमिकों की समस्या एवं ठेका पद्धति में सुधार को लेकर लगातार उच्च प्रबंधन से चर्चा किया जा रहा है, जिसका परिणाम है कि ठेका श्रमिकों की समस्या में सुधार एवं ठेका पद्धति में भी सुधार किया जा रहा है। अन्य समस्याओं पर जल्द ही उच्च प्रबंधन से चर्चा  कर उसका समाधान किया जाएगा।

यूनियन की बैठक में ये रहे मौजूद

बैठक में सीपी वर्मा, दीनानाथ सिंह सार्वा, मनोहर लाल आर दिनेश, गुरुदेव साहू, जसबीर सिंह, रिखी राम साहू, सुरेश दास टंडन, कान्हा, देवेंद्र कुमार, दाऊलाल, डामन लाल, रामू, नारायण, योगेश साहू, बलराम वर्मा, कामता प्रसाद एवं कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित थे।

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