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NET, SET और JRF पर कल्याण कॉलेज के रिसर्चर्स की अहम चर्चा, पढ़िए काम की खबर

  • किसी पुस्तक के किसी भी वाक्य से चार-पाँच बहुविकल्पीय प्रश्न बन सकते हैं।
  • इसलिए गंभीर अध्ययन के साथ-साथ स्वयं से प्रश्न बनाना भी सीखिए।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय (Kalyan Post Graduate College) के हिन्दी विभाग द्वारा नेट, सेट,आरएफ से सम्बन्धित परिचर्चा का आयोजन किया गया। यह परिचर्चा विभागाध्यक्ष डॉ.सुधीर शर्मा के संरक्षण व डॉ.फ़िरोज़ा जाफ़र अली और डॉ.अंजन कुमार के सफल निर्देशन में हुआ।

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कॉलेज के नव-पदोन्नत प्राचार्य डॉ.विनय शर्मा की अध्यक्षता और कला संकायाध्यक्ष डॉ.लखन चौधरी की गौरवपूर्ण उपस्थिति में हिन्दी डिजिटल कक्ष में सम्पन्न हुआ हुई। इस महत्त्वपूर्ण परिचर्चा का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्पण से हुआ।

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परिचर्चा का सूत्रपात डॉ.सुधीर शर्मा के उद्बोधन से हुआ। एनटीए नेट में प्रश्न बनाने का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि हिन्दी साहित्य में प्रश्नों की विपुलता है। किसी पुस्तक के किसी भी वाक्य से चार-पाँच बहुविकल्पीय प्रश्न बन सकते हैं इसलिए गंभीर अध्ययन के साथ-साथ स्वयं से प्रश्न बनाना भी सीखिए।

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भाग की प्राध्यापक डॉ.फिरोज़ा ज़ाफ़र अली ने विभाग के जेआरएफ शोधार्थियों द्वारा किए गए इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि अगर सागर से मोती निकालने का सपना देखते हो तो सागर की गहराई में उतरना होगा, सफलता पाना चाहते हो तो मेहनत भी करनी होगी।

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कला संकायाध्यक्ष डॉ. लखन चौधरी ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए सामान्य शिक्षा की पढ़ाई से अधिक मेहनत और लगन की आवश्यकता होती है।

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परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ.विनय शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को सही दिशा मिलेगी। हिन्दी विभाग द्वारा की गई इस पहल से अन्य विभागों के विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी। भविष्य में इस प्रकार के बड़े आयोजन होने चाहिए जिसमें सभी विषयों के विद्यार्थी सम्मिलित हों।

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शोधार्थी अंजली भटनागर ने नेट/सेट/जेआरएफ से सम्बन्धित आधारभूत बातों को समझाया कि परीक्षा के लिए कब आवेदन करना होता है? आवेदन कैसे करना है? इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लाभ क्या हो सकते हैं? परीक्षा के बाद कट-ऑफ कैसे बनता है? आदि प्रश्नों के उत्तर परिचर्चा में साझा किया।

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हिन्दी विभाग के शोधार्थी निमाई प्रधान ने नेट परीक्षा के प्रथम प्रश्न-पत्र के बारे में विस्तृत जानकारी दी। एनटीए नेट का प्रथम प्रश्न पत्र सभी विषयों में लागू होता है। निमाई प्रधान ने दस इकाइयों में विभाजित प्रथम प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम को प्रश्नों के उदाहरणों के साथ परिचर्चा में साझा किया।

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शोधार्थी बिमला नायक ने हिन्दी साहित्य में नेट के दूसरे प्रश्न पत्र के पाठ्यक्रम के इकाई एक से लेकर इकाई चार तक की विषय-वस्तु पर विस्तारपूर्वक चर्चा की और मनोरंजक ढंग से विद्यार्थियों तक अपनी बात पहुंचायी। इसी क्रम में शोधार्थी घनश्याम ने नेट की तैयारी के सम्बन्ध में अपने अनुभव साझा करते हुए हिन्दी साहित्य के दूसरे प्रश्न पत्र की तैयारी पर विचार रखे और पाँचवीं से सातवीं इकाई तक के पाठ्यक्रम को साझा किया। उसके बाद इसी पाठ्यक्रम के अंतिम तीन इकाइयों पर शोधार्थी पूरन कुमार ने अपने विचार प्रस्तुत किए और नेट की तैयारी के दौरान के अपने अनुभवों को साझा किया।ये खबर भी पढ़ें: BSP News: स्वच्छता का मंत्र, सफाई मित्रों का सम्मान, भिलाई टाउनशिप में ईडी संग अफसरों-कर्मियों ने उठाया झाड़ू

राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली इस परीक्षा के प्रश्नों में दिनों-दिन हो रहे बदलावों को शोधार्थी जितेंद्र ने बताया और परिचर्चा में प्रश्नों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए।
हिन्दी साहित्य में नेट परीक्षा की तैयारी करने के लिए उपयोगी पुस्तकों और इंटरनेट की सामग्रियों को शोधार्थी राकेश कुमार ने साझा किया और परिचर्चा का संचालन-भार भी बख़ूबी सँभाला।

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हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ.अंजन कुमार ने इस परिचर्चा की आद्यंत सूत्रधारिता की और परिचर्चा की सफलता का श्रेय हिन्दी विभाग के जेआरएफ शोधार्थियों और परिचर्चा में भागीदार के रूप में उपस्थित रहे जिज्ञासु विद्यार्थियों को दिया।

इस परिचर्चा में कल्याण महाविद्यालय के स्नातकोत्तर और स्नातक के विद्यार्थियों सहित साइंस कॉलेज सहित कई और कॉलेजों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों की उपस्थिति रही।

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