What is Samudrayaan Mission india launch date Matsya 6000 submarine

इस मिशन में जिस पनडुब्बी का इस्तेमाल होगा, उसका नाम मत्स्य-6000 (Matsya-6000) रखा गया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन के अहम मॉड्यूल को इसरो डेवलप कर रहा है।
उस मॉड्यूल में क्रू रहेगा, साथ ही लाइफ सपोर्ट सिस्टम और अन्य जरूरी चीजें भी होंगी। मॉड्यूल को टाइटेनियम से बनाया जा रहा है, जिसकी मोटाई 80 एमएम होगी। रिपोर्ट के अनुसार, क्योंकि मॉड्यूल टाइटेनियम का है, इसलिए उसकी वेल्डिंग के लिए जो काबिलियत चाहिए, वह सिर्फ इसरो के पास है।
इसरो की विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर फैसिलटी (VSSC) को यह टास्क पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। कहा जाता है कि काम पूरा करने के लिए VSSC को अपनी मशीनरी में कुछ सुधार करने पड़े। मॉड्यूल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वह समुद्र तल से 6 हजार मीटर गहराई तक दबाव को झेल सके।
रूस से भी मदद
भारत के पास ऐसी फैसिलिटीज की कमी है, जिसमें मॉड्यूल को टेस्ट किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार उसे रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में टेस्ट किया जाएगा। मॉड्यूल का काम अगले कुछ महीनों में पूरा हो सकता है, जिसे नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओसियन टेक्नॉलजी को सौंपा जाएगा। यह इंस्टिट्यूट पूरे मिशन को लीड कर रहा है। भारत कामयाब होता है तो वह अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान और चीन जैसे देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जो वैज्ञानिकों को गहरे समुद्री मिशनों में भेज चुके हैं।



