छत्तीसगढ़ में “NGO घोटाला” का महाभंडाफोड़! मंत्री और 7 IAS पर CBI की नज़र — 15 साल तक सरकारी फंड की लूट का खेल

विपक्ष का आरोप — “अफसर-मंत्री गठजोड़ ने रचा 15 साल का भ्रष्टाचार”
CBI ने ली SRC घोटाले की जांच — पूर्व मंत्री और 7 IAS अधिकारी निशाने पर
2004 से 2019 तक दिव्यांग सहायता के नाम पर उड़ाए गए करोड़ों सरकारी रुपये
RTI कार्यकर्ता कुंदन ठाकुर की शिकायत से खुला राज़ — फर्जी बिल, डबल सैलरी, बिना ऑडिट खर्च
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक सिस्टम को हिला दिया है। सरकारी अफसरों और मंत्री ने मिलकर “सरकारी विभाग जैसा NGO” बनाकर करीब 15 साल तक करोड़ों रुपये हड़प लिए! अब CBI ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है, और जांच में खुल रहे परत दर परत राज “भ्रष्टाचार का सबसे संगठित मॉडल” माने जा रहे हैं।
घोटाले की जड़ें — “State Resource Center” नाम का फर्जी NGO!
साल 2004 में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री और 7 वरिष्ठ IAS अधिकारियों ने मिलकर “State Resource Center (SRC)” नामक NGO बनाया।
नाम था दिव्यांग सहायता संस्था, लेकिन हकीकत में ये सिर्फ कागज़ों पर बना फर्जी संस्थान था —
ना कोई दफ्तर, ना कोई कर्मचारी, ना कोई काम।
लेकिन सरकारी फंड सीधा इसी NGO के खाते में जाता रहा।
करीब 15 साल तक करोड़ों रुपए “दिव्यांग कल्याण” के नाम पर खाए गए। CBI सूत्रों के मुताबिक, यह खेल 2004 से 2019 तक चलता रहा — यानी सरकारें बदलीं, अफसर बदले, पर भ्रष्टाचार का तंत्र जस का तस रहा!
कैसे हुआ घोटाला — “कागज़ी कर्मचारी, डबल सैलरी और काल्पनिक दफ्तर”
CBI जांच में सामने आया कि —
एक ही कर्मचारी का नाम कई जगह दिखाकर डबल सैलरी निकाली जाती थी।
फर्जी बिल, गायब वाउचर और काल्पनिक मशीनें दिखाकर करोड़ों का फर्जी खर्च दर्ज किया गया।
NGO के पास कोई मान्यता नहीं थी, फिर भी हर साल सरकारी विभागों से सीधा फंड ट्रांसफर होता रहा।
कोई ऑडिट नहीं, कोई जनरल बॉडी नहीं, कोई बैठक नहीं — लेकिन “फंड रिलीज़” हर साल जारी रहा।
CBI के अनुसार, कुल 31 तरह की वित्तीय अनियमितताएँ इस एक ही संस्था से जुड़ी पाई गई हैं।
CBI की जांच में अब तक क्या निकला?
बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने समाज कल्याण विभाग के कार्यालय पर छापे मारे और हजारों दस्तावेज़ जब्त किए। इनमें फर्जी नियुक्ति पत्र, वेतन रजिस्टर और बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड मिले हैं। जांच एजेंसी ने 14 मुख्य आरोपियों को चिन्हित किया है, जिनमें कई नाम बेहद बड़े हैं।
मुख्य आरोपी — सत्ता और अफसरशाही का गठजोड़!
CBI ने जिन लोगों पर नज़र गड़ाई है, उनमें प्रमुख नाम हैं:
रेणुका सिंह (पूर्व समाज कल्याण मंत्री)
IAS विवेक ढांढ
IAS एम.के. राउत
IAS डॉ. आलोक शुक्ला
IAS सुनील कुजूर
IAS बी.एल. अग्रवाल
IAS सतीश पांडे
IAS पी.पी. श्रोती (रिटायर्ड)
इन सभी ने मिलकर SRC के नाम से NGO चलाया और सरकारी राशि का गबन किया।
RTI ने खोला करोड़ों के घोटाले का राज़!
इस फर्जीवाड़े की परतें 2016 में RTI कार्यकर्ता कुंदन ठाकुर की अर्जी से खुलनी शुरू हुईं। RTI से यह सामने आया कि जिन कर्मचारियों को SRC में नियुक्त बताया गया था, वे वास्तव में किसी अन्य विभाग में कार्यरत थे — लेकिन सैलरी दोनों जगह से उठाई जा रही थी!
फर्जीवाड़े का फॉर्मूला:
1. दिव्यांग सहायता के नाम पर NGO बनाओ
2. सरकारी फंड ट्रांसफर करवाओ
3. काल्पनिक खर्च दिखाओ
4. डबल सैलरी निकालो
5. बिना ऑडिट सब क्लियर कर दो
यही “फॉर्मूला” करीब 15 साल तक निर्बाध रूप से चलता रहा।
अब सख्त एक्शन की बारी!
CBI अब इस केस में चार्जशीट फाइल करने की तैयारी में है, और सूत्रों के अनुसार,
“कई और जिलों के अफसर, लेखाधिकारी व NGO संचालक” भी इसमें फंस सकते हैं।
जांच टीम अब फंड ट्रांसफर से जुड़े बैंक खातों की ट्रेसिंग कर रही है।
जनता में गुस्सा, राजनीति में हलचल!
घोटाले के खुलासे के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्ष ने इसे “अफसर-मंत्री गठजोड़ का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार” बताया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों में मौन और डर का माहौल देखा जा रहा है क्योंकि कई अधिकारी अब भी सक्रिय सेवा में हैं।
CBI के अनुसार यह सिर्फ शुरुआत है!
CBI अधिकारियों का कहना है —
“यह घोटाला सिर्फ एक NGO तक सीमित नहीं, बल्कि यह मॉडल कई अन्य योजनाओं में भी दोहराया गया है।”
जांच के बढ़ने के साथ कई नए नाम सामने आ सकते हैं, जो अब तक ‘सिस्टम’ के भीतर सुरक्षित बैठे थे।
छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा “पैरेलल डिपार्टमेंट घोटाला”
एक NGO, जो दिखने में समाज सेवा का प्रतीक था,
असल में भ्रष्टाचार की फैक्ट्री निकला।
15 साल तक चलती रही “फर्जी सैलरी स्कीम”,
और किसी को भनक तक नहीं लगी।
अब CBI की एंट्री ने इस मामले को बना दिया है —
“छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा एडमिनिस्ट्रेटिव स्कैम”
जनता बस अब यही पूछ रही है —
“क्या इस बार कोई बड़ा नाम जेल जाएगा या फिर फाइलें फिर किसी दराज में बंद हो जाएँगी?”
