अगर ये मांग होती रही तो कइयों को न्यूनतम पेंशन 1000 भी नहीं मिल सकती…

- मांग तथ्यों और व्यावहारिकता पर आधारित होनी चाहिए।
सूचनाजी न्यूज, छत्तीसगढ़। कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (Employee Pension Scheme 1995) को लेकर विवाद थम नहीं रहा है। रामकृष्ण पिल्लई का कहना है कि यदि आप अपने योगदान के आधार पर पेंशन की मांग करते हैं, तो कई लोगों को न्यूनतम 1000 रुपये की पेंशन भी नहीं मिल सकती है।
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ध्यान दें कि जिन्होंने एक महीने के लिए ईपीएस (EPS) में योगदान दिया है+एफपीएस में 119 महीने का योगदान दिया है, उन्हें 1000.00 रुपये प्रति माह मिल रहे हैं। सरकार ईपीएस में हर साल 900+ करोड़ रुपये का योगदान देकर इसे सब्सिडी दे रही है, जो वैधानिक रूप से देय राशि के अतिरिक्त है।
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रामकृष्ण पिल्लई ने कहा-मैं यह नहीं कहता कि 1000 रुपये उचित या पर्याप्त है, लेकिन मैं शुद्ध गणित पर प्रकाश डाल रहा हूँ। मुझे केवल 1224 रुपये प्रति माह पेंशन मिल रही है। मुझे लगता है कि हमें 2014 से मुद्रास्फीति के आधार पर सरकार से मांग करनी चाहिए।
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हमें सरकार से अधिक योगदान, अधिक सब्सिडी और अधिक पेंशन पाने के लिए पेंशन फंड में योगदान करने के अधिक रास्ते की मांग करनी चाहिए। वर्ष 2028 से, अधिकांश नए पेंशनभोगियों को 7500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे, जिन्होंने 33+ वर्षों तक पेंशन फंड में योगदान दिया है और अन्य को आनुपातिक रूप से कम।
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समस्या उन लोगों के साथ है जो कम पेंशन योग्य सेवा और पेंशन योग्य वेतन के साथ सेवानिवृत्त हुए हैं। सरकारी सब्सिडी केवल उन पेंशनभोगियों तक ही सीमित है। हमें पिछले संशोधन और मुद्रास्फीति के बाद से वेतन में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए पेंशन योग्य वेतन सीमा को 15,000 से बढ़ाने की मांग करनी चाहिए ताकि भविष्य के पेंशनभोगियों को बेहतर पेंशन मिल सके।
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मांग तथ्यों और व्यावहारिकता पर आधारित होनी चाहिए। मेरा मानना है कि कोई भी सरकार न्यूनतम पेंशन के रूप में 7500 रुपये से अधिक की न्यूनतम पेंशन पर सहमत नहीं होगी, जब मौजूदा कानून के तहत अधिकतम पेंशन 7500 रुपये है।
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