कमीशन के लालच में बैंक खाते देने वाले 7 आरोपी पुलिस की कार्रवाई के दायरे में, साइबर ठगी के लाखों के लेन-देन का खुलासा

दुर्ग पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, सुपेला और खुर्सीपार क्षेत्र के बैंक खातों का साइबर अपराध में इस्तेमाल होने का आरोप; पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड सहित अन्य दस्तावेज जब्त
दुर्ग। साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में बैंक खातों के कथित इस्तेमाल के मामले में दुर्ग पुलिस ने सात खाताधारकों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की है। थाना सुपेला, थाना खुर्सीपार और एसीसीयू दुर्ग की संयुक्त कार्रवाई में सामने आया कि संबंधित खाताधारक कथित तौर पर 5 हजार से 15 हजार रुपये तक के कमीशन के लालच में अपने बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और सिम कार्ड दूसरे लोगों को उपलब्ध कराते थे। पुलिस के अनुसार, इन खातों के माध्यम से साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि का लेन-देन और हस्तांतरण किया गया तथा लाखों रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं।
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर साइबर अपराधों में म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत बैंक खातों के लेन-देन का विश्लेषण, तकनीकी साक्ष्यों और विवेचना के आधार पर सात खाताधारकों की पहचान कर कार्रवाई की गई।
सुपेला क्षेत्र के दो और खुर्सीपार के पांच खाताधारक
दुर्ग पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, थाना सुपेला क्षेत्र में फेडरल बैंक और उत्कर्ष बैंक से संबंधित दो खाताधारकों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। वहीं, थाना खुर्सीपार क्षेत्र में इंडियन बैंक से संबंधित पांच खाताधारकों को कार्रवाई के दायरे में लिया गया। यह कार्रवाई 14 अक्टूबर 2026 को की गई।
पुलिस ने इस मामले में शुभम चौधरी (22 वर्ष), निवासी सुभाष नगर, नंदिनी रोड, छावनी तथा गुरमीत कौर, निवासी कृपाल नगर, कोहका के नाम बताए हैं। ये दोनों मामले थाना सुपेला क्षेत्र से संबंधित हैं।
इसी तरह थाना खुर्सीपार क्षेत्र से तरुण नायक (40 वर्ष), निवासी जोन-1 खुर्सीपार; निखिल नेताम (22 वर्ष), निवासी एसटीएफ कॉलोनी, बघेरा; यसमीत सिंह (22 वर्ष), निवासी शिवाजी नगर, खुर्सीपार; गौरव साहू (23 वर्ष), निवासी शंकर नगर, सद्भावना चौक और नरगिस, निवासी मछली मार्केट, जोन-2 खुर्सीपार के नाम सामने आए हैं।
5 से 15 हजार रुपये के कमीशन का लालच
पुलिस की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि संबंधित खाताधारक आर्थिक लाभ के बदले अपने बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड दूसरे व्यक्तियों को उपलब्ध कराते थे। इसके बाद इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को जमा करने और अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करने के लिए किए जाने की आशंका है।
ऐसे बैंक खातों को आम तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल ठगी से प्राप्त धनराशि को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने और रकम के वास्तविक स्रोत तथा लेन-देन से जुड़े लोगों की पहचान छिपाने के लिए कर सकते हैं। ऐसे मामलों में खाताधारक की भूमिका, जानकारी और संलिप्तता की जांच महत्वपूर्ण होती है।
बैंकिंग दस्तावेज और सिम कार्ड जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार, बैंक खातों के विश्लेषण और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है।
प्रकरण थाना सुपेला के अपराध क्रमांक 1321/2026 और 1324/2026 तथा थाना खुर्सीपार के अपराध क्रमांक 272/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 318(3) और 317(4) में दर्ज बताए गए हैं। मामले की विवेचना जारी है।
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से की सतर्क रहने की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या अन्य आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक अथवा मोबाइल सिम किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। ऐसा करने पर बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी में हो सकता है और खाताधारक को भी जांच तथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
यदि किसी व्यक्ति को अपने बैंक खाते या वित्तीय दस्तावेजों के दुरुपयोग की आशंका हो, तो वह तत्काल संबंधित बैंक और नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दे सकता है। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत हेल्पलाइन नंबर 1930 या आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर भी दर्ज कराई जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और नागरिकों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी।



