Bhilai Steel Plant के मेन गेट पर कब्जा: 8 में से अब सिर्फ 4 ही चालू, गेट तोड़कर बना CISF आफिस, CITU ने खोला राज

- बायोमेट्रिक सिस्टम लागू होने के बाद बढ़े तनाव पर सीटू ने खोला राज।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट (Bhilai Steel Plant) के मेन गेट को लेकर पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू ने बड़ा रोज खोल दिया है। बीएसपी के गेट को बंद करने का आरोप सीआएसएफ पर लगाया गया है। गेटों के ऊपर बदल रही व्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त किया है।
सीटू ने कहा कि 1 जुलाई को जब बायोमेट्रिक फेस रीडिंग अटेंडेंस सिस्टम (Biometric Face Reading Attendance System) शुरू हुआ था, तब संयंत्र के सभी गेटों पर बीएसपी (BSP) के अधिकारी एवं सीआईएसएफ अधिकारी एवं कर्मचारी को भारी तादाद में तैनात कर दिया गया था। जो संयंत्र के अंदर आने एवं बाहर जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की व्यवस्था को संभाल रहे थे।
समय बीतने के साथ धीरे-धीरे स्थितियां बदलने लगी। आज स्थिति यह थी कि 30 जुलाई को मेन गेट में तैनात एक 3 स्टार अधिकारी लगातार अपनी मोबाइल देख रहे थे एवं किसी से मोबाइल पर बात कर रहे थे।
वहीं, दो पहिया वाहनों में अंदर आने वाले कर्मचारी लगातार हॉर्न बजाकर परेशान हो रहे थे, जिससे स्थिति स्पष्ट हो गई कि गेटों पर से अब सीआईएसएफ की चौकसी धीरे-धीरे कम करनी शुरू हो गई है।
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कार को अंदर करवाने तैनात रहते हैं उच्च अधिकारी, नहीं देते हैं दो चक्का वाहनों पर ध्यान
सीटू का कहना है कि उच्च प्रबंधन ने गेट की व्यवस्था के लिए महाप्रबंधक एवं मुख्य महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों की तैनाती गेटों पर किया था, जिनका काम सुचारू रूप से कर्मियों एवं अधिकारियों को गेटो के अंदर करवाने की व्यवस्था को देखना था।
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किंतु वे केवल कारों को ही अंदर करवाने की व्यवस्था में लगे रहे। धीरे-धीरे यह बात स्पष्ट होने लगी कि कारों में आने वालों में अधिकारियों की संख्या अधिक है तथा देर होने पर उनके बायोमैट्रिक अटेंडेंस में रेड मार्क हो सकता है। इसीलिए जल्दी-जल्दी उन्हें अंदर करवा दो। इन अधिकारियों ने 1 महीने में कर्मचारियों के अंदर जाने की व्यवस्था पर कभी भी ध्यान नहीं दिया।
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खुलने वाले गेटों की संख्या हुई कम
सीटू के पदाधिकारियों ने बताया कि शुरू-शुरू में स्थिति यह थी कि प्लांट के अंदर आने एवं बाहर जाने के लिए सभी गेटों को खोल दिया जाता था। किंतु धीरे खुलने वाले गेटों की संख्या एवं गेटों में तैनात होने वाले सीआईएसएफ जवानों की संख्या कम होती चली गई।
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जबकि व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मौजूद सभी गेटों को खोलने के साथ-साथ गेटों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए एवं सामान्य पाली में प्लांट से बाहर जाते समय अंदर आने वाले कार गेट को भी खोल देना चाहिए, ताकि कारों की अफरा तफरी से बचा जा सके।
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गेट बंद करके खोला गया सीआईएसएफ का ऑफिस
मेन गेट में प्रवेश के लिए जितने गेट बने हुए थे उसमें से कुछ गेट बंद करके उस जगह सीआईएसएफ ऑफिस का निर्माण हुआ है, जिसके करण गेटो की संख्या घटी है। अब आठ गेट की जगह मात्र चार ही गेट बचे हैं। इसीलिए सामान्य पाली में दो पहिया वाहनों के गेटों पर बहुत ज्यादा प्रेशर रहता है।
सीटू की मांग है कि उस ऑफिस को हटाकर वहां पूर्व की तरह गेट बनाएं। साथ ही साथ इस प्रेशर से बचने के लिए सामान्य पाली में यूनिवर्सल रेल मिल की तरफ जाने वाले गेट को भी तैयार करके खोलने की दिशा में प्रयास प्रारंभ करें, ताकि यूनिवर्सल रेल मिल एवं रेल मिल के तरफ जाने वाले कर्मियों का मेन गेट पर दबाव को घटाया जा सके।
पॉल्यूशन जोन में तब्दील हो रहे हैं गेट
गेटों पर गाड़ियों की भारी जमावड़ा के चलते पूरा एरिया पॉल्यूशन जोन में तब्दील होता चला जा रहा है, जिसका प्रतिकूल असर कर्मियों अधिकारियों के साथ-साथ सीआईएसएफ के जवानों पर पड़ रहा है। गेटों की संख्या बढ़ने से दो पहिया वाहनों का दबाव घटेगा, जिसके चलते पॉल्यूशन को भी एक हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
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