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छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर, अस्पतालों में डॉक्टर नदारद और मेडिकल कॉलेज फैकल्टी विहीन: कांग्रेस

CGMSC और फार्मेसी काउंसिल पर कमीशनखोरी के आरोप, 152 संविदा पदों पर केवल दो नियुक्तियों का दावा; भाजपा सरकार पर बरसे प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा

       रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी है, वहीं मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों और फैकल्टी के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) और फार्मेसी काउंसिल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए दवा खरीदी, टेंडर और ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित कमीशनखोरी के आरोप लगाए।

रायपुर मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की कमी का आरोप

       सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि राजधानी रायपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त फैकल्टी उपलब्ध नहीं है। उनके अनुसार, संविदा भर्ती के 152 पदों में केवल दो पदों पर ही ज्वाइनिंग हुई है। उन्होंने इसके लिए सरकार की कथित हठधर्मिता और कम वेतन को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि योग्य प्रोफेसर नियुक्ति में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसका असर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के साथ अस्पतालों में मरीजों के इलाज पर भी पड़ रहा है।

CGMSC और फार्मेसी काउंसिल की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

       कांग्रेस प्रवक्ता ने CGMSC और फार्मेसी काउंसिल की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में रखते हुए आरोप लगाया कि गुजरात की ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से दवा खरीदी में अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति पर भी सवाल उठाते हुए कथित फर्जी डिग्री और उच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी का आरोप लगाया।

       वर्मा ने दावा किया कि दवा खरीदी, टेंडर प्रक्रिया और ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित वसूली का समानांतर तंत्र सक्रिय है। इसके चलते सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की कमी हो रही है और मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए भटक रहे मरीज: कांग्रेस

       कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राजधानी रायपुर से लेकर दूरस्थ जिलों के अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों और फैकल्टी के अभाव के कारण चिकित्सा शिक्षा और मरीजों का उपचार प्रभावित हो रहा है।

       उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। जांच और इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वर्मा ने इसे भाजपा सरकार के सुशासन के दावों के विपरीत स्थिति बताया।

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की योजनाओं का किया उल्लेख

       सुरेन्द्र वर्मा ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में संचालित सुराजी गांव योजना, हाट-बाजार क्लिनिक योजना, मोहल्ला क्लीनिक, मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना और धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया था और मेडिकल कॉलेजों में नियुक्तियां पारदर्शी तरीके से की गई थीं।

       उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य विभाग में मरीजों की सुविधाओं के बजाय टेंडर और ट्रांसफर-पोस्टिंग को प्राथमिकता दी जा रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार से जवाब मांगा

       कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि गरीब, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को समय पर डॉक्टर, जांच और दवाइयां उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने भाजपा सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पदों और CGMSC व फार्मेसी काउंसिल की कार्यप्रणाली को लेकर जवाब मांगा।

       उन्होंने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बजाय कथित सिंडिकेट के माध्यम से वसूली के आरोप सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। कांग्रेस ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और आम जनता को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की मांग की है।

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