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सड़क पर मशाल जुलूस था ADM बिल्डिंग, DIC दफ्तर में नहीं, BAKS ने घसीटा राजेंद्र सिंह, BN चौबे, रामाश्रय प्रसाद का नाम

बीएकेएस बोकारो ने कहा-19 अक्टूबर 2024 को बीएसएल में होगी ऐतिहासिक हड़ताल।

सूचनाजी न्यूज, बोकारो। बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ नें बोकारो इस्पात संयंत्र में 19 अक्टूबर 2024 को आयोजित होने वाले हड़ताल को लेकर अपना पक्ष रखा है।

अध्यक्ष हरिओम ने बताया कि प्रबंधन पहली बार कर्मचारियों के विशुद्ध हड़ताल को लेकर डरी हुई है। उसी के कारण कर्मचारियों में भय का वातावरण बैठाने के लिए, मशाल जुलुस में शामिल होने पर कुछ कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस दिया गया। जबकि यूनियन तथा कर्मचारियों ने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया था।

भारतीय संविधान में प्रदर्शन का अधिकार मौलिक अधिकार की श्रेणी में आता है। अपनी माँगों के लिए बीएसएल कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। बीएकेएस यूनियन तथा बीएसएल कर्मचारियों ने सड़क पर प्रदर्शन किया था न कि एडीएम के भीतर डायरेक्टर इंचार्ज के कमरे में।

हरिओम ने कहा-पूर्व में एटक नेता अनिरुद्ध, एके अहमद आदि के मामले में 2007 में दर्ज केस के मामले में प्रबंधन बोकारो कोर्ट में केस भी हार चुकी है।

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वहीं, राजेंद्र सिंह, बीरेंद्र चौबे, रामाश्रय सिह, बीडी प्रसाद बीएसएल के कर्मचारी नहीं है। फिर भी पिछले दिनों प्लांट के भीतर गोल चक्कर पर जाकर किस हैसियत से प्रदर्शन किए थे। संयंत्र के कर्मचारियों तथा अधिकारियों से गाली गलौज भी किए थे।
बदले की भावना के तहत की गई कारवाई में कई बीएसएल अधिकारी रिटायरमेंट के बाद भी कोर्ट का चक्कर लगाएंगे।

पूर्व में बीएसएल के आफिसर एशोसिएशन तथा यूनियनों ने हॉट स्ट्रिप मिल सहित कई विभागों को बंद करवाया था, उस पर आज तक बीएसएल प्रबंधन ने कोई कड़ा कदम नहीं उठाया।

अध्यक्ष हरिओम ने कहा कि हमारी यूनियन अपने प्रत्येक सदस्य का मामला कोर्ट में लड़ेगी, क्योकि एक भी सदस्य की परेशानी को बीएकेएस में यूनियन की परेशानी समझा जाता है।

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हड़ताल की तैयारी पर बड़ा दावा

हड़ताल की तैयारी पर यूनियन महासचिव दिलीप ने बताया कि कर्मचारियों का भारी समर्थन यूनियन तथा पदाधिकारियों को मिल रहा है।

कर्मचारी हड़ताल में शामिल होने के लिए खुद संकल्प तथा शपथ ले रहे हैं। कंपनी के सभी अधिकारी मैनेजर हैं, मालिक नहीं। वहीं, सभी कर्मचारी है। नौकर या गुलाम नहीं।

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हमारी यूनियन कई मामले को कोर्ट में ले जाएगी। चाहे वह कर्मचारियों का मामला हो या अधिकारियों के निजी भ्रष्टाचार का, क्योंकि अब यह व्यक्ति लड़ाई बन चुकी है।

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