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छत्तीसगढ़दुर्ग-भिलाई

चेक बाउंस मामले में दोषी पाए गए बलविंदर सिंह, 10 माह सश्रम कारावास की सजा

चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी के 5.66 लाख रुपए का भुगतान न होने पर आरोपी को सजा, अतिरिक्त 3 माह की सजा का भी प्रावधान


भिलाई।
वाहन फाइनेंस करवाने के बाद दिया गया चेक अनादरित होने पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया है और 10 माह सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मामला चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड शाखा कार्यालय चौहान स्टेट मौर्या टॉकीज के पास सुपेला भिलाई का है। जिसमें खुर्सीपार निवासी 33 वर्षीय बलविंदर सिंह को न्यायालय ने यह सजा सुनाई है।

       न्यायालय श्रीमती प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट सरोजिनी जनार्दन खरे ने अपने फैसले में कहा है कि आरोपी बलविंदर सिंह परिवादी चोलामंडलम फाइनेंस को एक माह के अंदर निर्धारित 5 लाख 66 हजार 490 रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान करेगा। यह राशि अदा नहीं करने पर आरोपी तीन माह अतिरिक्त कठोर कारावास के दंड का भाग होगा।  

       प्रकरण के मुताबिक आरोपी बलविंदर सिंह ने टाटा एचबी वाहन के लिए चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड से फाइनेंस करवाया था। जिसके लिए उसने कंपनी को 6 अप्रैल 2016 को 5 लाख 66 हजार 490 रुपए का चेक (क्रमांक 04436) दिया था।

       चोलामंडलम कंपनी ने इस चेक को आईसीआईसीआई बैंक शाखा भिलाई में भुगतान के लिए 2 मई 2016 को जमा किया था लेकिन संबंधित बैंक के द्वारा 3 मई 2016 को यह चेक खाते में रकम पर्याप्त होने का कारण दर्शाते हुए अनादरित कर दिया गया। जिसकी सूचना फाइनेंस कंपनी के द्वारा आरोपी को 24 मई 2016 को भेजी गई जो अपूर्ण पते की टीप के साथ वापस आ गई थी। फाइनेंस कंपनी का कहना है कि आरोपी को चेक के अनादरित होने की सूचना थी और उसने नियमानुसार उक्त राशि का भुगतान 15 दिन की निर्धारित अवधि में नहीं किया। चोलामंडलम फाइनेंस ने न्यायालय से दरख्वास्त की थी कि आरोपी के विरुद्ध धारा 138 परक्राम्य में लिखत अधिनियम 1881 के अधीन दंडित किया जाए।  अदालत ने अपने फैसले में आरोपी को दोषसिद्ध करते हुए धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के आरोप में 10 माह के सश्रम कारावास का दंड दिया है। इस मामले में चोलामंडलम फाइनेंस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शकील अहमद सिद्दीकी ने पैरवी की।

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