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तमिलनाडु की राजनीति में बदलते समीकरण, पुराने गठबंधन टूटे तो नए रास्ते खुले

AIADMK-बीजेपी गठबंधन टूटने से बदला राजनीतिक समीकरण

TVK के उभार से तमिलनाडु में गठबंधन राजनीति का नया दौर शुरू

       चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। सत्ता की शतरंज पर नए समीकरण बन रहे हैं और पुराने रिश्तों की परिभाषाएं बदलती नजर आ रही हैं। हालांकि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर कई चर्चाएं तेज हैं, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि AIADMK और बीजेपी के रिश्तों में दरार कोई नई कहानी नहीं है।

       दरअसल, AIADMK ने बीजेपी से अपना गठबंधन सितंबर 2023 में ही तोड़ दिया था। यह फैसला उस समय तमिलनाडु की राजनीति का बड़ा मोड़ माना गया था, क्योंकि 2021 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दल लंबे अंतराल के बाद साथ आए थे। लेकिन राजनीतिक मतभेदों और क्षेत्रीय असंतुलन के कारण यह साथ ज्यादा लंबा नहीं चल पाया।

       अब मई 2026 के राजनीतिक परिदृश्य में फिर नए गठबंधनों और सत्ता समीकरणों की चर्चा हो रही है। अभिनेता-नेता विजय की पार्टी TVK के उभार ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है। ऐसे में पुराने दल अपने-अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नए सहयोगियों की तलाश में दिखाई दे रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु की राजनीति अब पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से आगे बढ़कर गठबंधन-आधारित नई रणनीतियों की ओर बढ़ रही है। यही वजह है कि चुनाव परिणामों के बाद सत्ता गठन को लेकर लगातार बैठकों, चर्चाओं और संभावित समझौतों की खबरें सामने आ रही हैं।

       राजनीतिक जानकारों के अनुसार, 2026 का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी माना जा रहा है—जहां क्षेत्रीय दलों की ताकत, गठबंधन की मजबूरी और नई पीढ़ी के नेतृत्व का प्रभाव एक साथ दिखाई दे रहा है।

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