में गंगा नदी में पलटी नाव, 13 की मौत; बच्चों की लाशें देख गांव में मचा कोहराम

इस हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत की खबर है। मृतकों में बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हैं। हादसे की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। जिन घरों से लोग भोज में शामिल होने के लिए निकले थे, वहां हादसे की खबर पहुंचते ही मातम छा गया।
बीच नदी में पलटी नाव, मची चीख-पुकार
जानकारी के मुताबिक, रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला में माता महारानी स्थान के पास सिंघेश्वर राय के यहां श्राद्ध भोज आयोजित था। ग्रामीण नाव से नदी पार कर भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नाव बीच नदी में पलट गई और उस पर सवार लोग पानी में गिर गए।
नाव में कितने लोग सवार थे, इसको लेकर शुरुआती जानकारी अलग-अलग सामने आई। कुछ रिपोर्टों में 20 से 25 यात्रियों का उल्लेख है, जबकि अन्य में इससे अधिक लोगों के सवार होने की बात कही गई। हादसे का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
स्थानीय लोगों ने शुरू किया बचाव अभियान
नाव डूबने की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। लोगों ने पानी में डूब रहे यात्रियों को बचाने की कोशिश शुरू की। कई लोगों को बाहर निकालकर एंबुलेंस और अन्य वाहनों से राघोपुर फतेहपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
अस्पताल में घायलों को उपचार दिया गया। हादसे के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों की तलाश में पहुंचे लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था।
प्रशासन और बचाव दल ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया। कुछ लोगों के लापता होने की खबर भी सामने आई, जिसके बाद नदी में उनकी तलाश जारी रही।
मासूमों की मौत से गांव में मातम
इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह रही कि मृतकों में कई बच्चे शामिल थे। जिन बच्चों को परिवार के साथ भोज में शामिल होना था, वे घर वापस नहीं लौट सके। हादसे की खबर से पूरे इलाके में शोक का माहौल बन गया।
मुख्यमंत्री ने घोषित की सहायता राशि
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। साथ ही अधिकारियों को राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने और घायलों को समुचित उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। यह दुर्घटना नदी पार करने के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और नावों में सुरक्षित क्षमता के पालन की आवश्यकता को एक बार फिर सामने लाती है।



