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आदिवासी गौरव की अनसुनी दास्तां—भारत के जनजातीय समाज का इतिहास बेहद प्रखर और प्रेरणादायक: डॉ. झा

       भिलाई। स्थानीय श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया ।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भगवान बिरसा मुंडा जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ ए के झा ने कहा कि बिरसा मुंडा एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और जन नायक थे। भारत के आदिवासी समुदाय का एक गौरवशाली इतिहास रहा है और इस समुदाय ने आजादी में अहम भूमिका निभाई है।

       विश्वविद्यालय के डायरेक्टर विकास डॉ सुशील चंद्र तिवारी ने कहा कि धरती आबा के रूप में पूजनीय बिरसा मुंडा का धरती और जड़ों के प्रति अगाध प्रेम और सम्मान था,आज जब हम उनकी जयंती गौरव दिवस के रूप में मना रहे हैं इस महान व्यक्तित्व के अप्रतिम योगदान को याद करते हैं।आदिवासी संस्कृति,सम्मान और आजादी के लिए अथक संघर्ष करने वाले भगवान बिरसमुंडा न केवल आदिवासी समुदाय के गौरव के प्रतीक बने बल्कि भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के महान नेता भी थे।

       पत्रकारिता डॉ संजीव कुमार ने अपने मुख्य उद्बोधन में कहा कि सभ्यता और संस्कृति की दृष्टि से विश्व मानचित्र पर भारत देश आदिमजाति बाहुल्य है।यहां विविध आदिमजातियों की जनसंख्या बहुतायत में है। जनजातियों का गौरवशाली इतिहास बताता है कि प्राचीन काल से इस समुदाय में मां भारती की सुरक्षा में अपना तन मन और धन समर्पित कर दिया।इस बात के प्रबल साक्षी जननायक बिरसा मुंडा हैं।ब्रिटिश हुकूमत से भारत को स्वतंत्रता दिलाने में इनका शौर्य,त्याग और बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

       समाज शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ स्नेह कुमार मेश्राम ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवादियों की गरीबी,अज्ञानता,भोलेपन का लाभ उठाने वालों के विरुद्ध महा विद्रोह छेड़ दिया था। उन्होंने आदिवादियों के भीतर जनजागरण का सफल अभियान चलाया,जिससे प्रभावित हो कर आदिवासी समुदाय उन्हें धरती आबा अर्थात् धरती के पिता के नाम से पूजने लगे।

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