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छत्तीसगढ़

देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को ‘औकात’ दिखाने की बात लोकतांत्रित मर्यादा का उल्लंघन – मनीष पाण्डेय

      भिलाई नगर। भाजपा युवा नेता मनीष पाण्डेय ने कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के साथ मुख्यमंत्री आवास का घेराव करते हुए देवेंद्र यादव छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की “औकात” दिखाने की बात कही, जो न केवल असंवेदनशील है बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन है।

      पाण्डेय ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस की सरकार पाँच वर्षों तक छत्तीसगढ़ में रही और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे, तब देवेंद्र यादव ने कभी छात्रसंघ चुनाव की मांग क्यों नहीं उठाई? चुनाव आते ही युवाओं के मुद्दों को हवा देना और मंच पर भाषण देकर खुद को जननेता साबित करना, यह केवल अवसरवादी राजनीति है। उन्होंने कहा कि देवेंद्र यादव ने अपने भाषण में जंगलों की कटाई और हसदेव के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरने की कोशिश की। जबकि हकीकत यह है कि हसदेव क्षेत्र में पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव कांग्रेस सरकार के समय ही आया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वयं कहा था कि “अगर पेड़ नहीं काटे जाएंगे तो सब अपनी बिजली छोड़ दें।” ऐसे में आज भाजपा पर आरोप लगाना और प्रधानमंत्री-गृहमंत्री को औकात दिखाने की बात करना जनता को गुमराह करने का प्रयास है।

       पाण्डेय ने कहा कि देश के 22 राज्यों में भाजपा और एनडीए की सरकारें हैं। यह जनता का विश्वास और सुशासन का परिणाम है। ऐसे में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की औकात पर सवाल उठाना वास्तव में जनता की समझ और लोकतांत्रिक जनादेश का अपमान है। उन्होंने कहा कि औकात की बात अगर करनी है तो राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी से पूछिए कि क्यों कांग्रेस आज देशभर में सिमटती जा रही है। उन्होंने विधायक देवेंद्र यादव के भिलाई में लगाए गए बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि व्यवहारिकता शब्दों से नहीं, कर्मों से झलकती है। लेकिन देवेंद्र यादव की व्यवहारिकता केवल भाषणों और पोस्टरों तक सीमित है। मनीष पाण्डेय ने मांग की कि देवेंद्र यादव सार्वजनिक रूप से माफी माँगें। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता और देश का हर नागरिक इस प्रकार की भाषा को स्वीकार नहीं करेगा। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन मर्यादा और सम्मान बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है।

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