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छत्तीसगढ़

250 रन का लक्ष्य भी नहीं बचा सका भारत, हार के बाद गौतम गंभीर बोले—गेंदबाजों का करियर भी दांव पर

रांची। बल्लेबाजों ने स्कोरबोर्ड पर 249 रन लगाए, गेंदबाजों ने शुरुआत में विकेट भी निकाले, लेकिन भारतीय टीम जीत तक नहीं पहुंच सकी। रांची में खेले गए दूसरे टी-20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने 250 रन का लक्ष्य हासिल कर भारत को छह विकेट से हरा दिया। मेहमान टीम ने 18.3 ओवर में चार विकेट पर 252 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम किया।

हार के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने गेंदबाजों की मुश्किलों पर बात की। उन्होंने बल्ले और गेंद के बीच संतुलित मुकाबले की जरूरत बताई। गेंदबाजों के करियर का जिक्र करते हुए गंभीर ने उनका बचाव किया, लेकिन साथ ही स्वीकार किया कि भारतीय टीम को ऐसी परिस्थितियों में बड़े स्कोर बचाने का तरीका खोजना होगा।

संजू सैमसन की पारी से भारत ने खड़ा किया बड़ा स्कोर

वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। भारत के बल्लेबाजों ने आक्रामक खेल दिखाते हुए निर्धारित 20 ओवर में पांच विकेट पर 249 रन बनाए।

संजू सैमसन ने 82 रन की शानदार पारी खेली। ईशान किशन ने 43 रन जोड़कर टीम को मजबूत शुरुआत देने में योगदान दिया। इसके बाद श्रेयस अय्यर ने 40 रन बनाए, जबकि तिलक वर्मा 44 रन पर नाबाद रहे। इन पारियों की बदौलत भारत ने वेस्टइंडीज के सामने 250 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।

इतना बड़ा स्कोर बनने के बाद भारत के पास मुकाबला जीतने का अच्छा अवसर था। हालांकि, दूसरी पारी में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजी पर दबाव बनाकर मैच की दिशा बदल दी।

शुरुआती विकेटों के बाद भी नहीं थमा वेस्टइंडीज

लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत अच्छी नहीं रही। भारतीय गेंदबाजों ने पहले ओवर में दो विकेट निकाले और शुरुआती छह ओवर के भीतर मेहमान टीम के तीन बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे।

इस स्थिति में भारत के पास दबाव बढ़ाने का मौका था, लेकिन शाई होप ने अपनी बल्लेबाजी से वेस्टइंडीज को मुकाबले में बनाए रखा। उन्होंने 102 रन की शतकीय पारी खेली और बड़े लक्ष्य तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई।

होप की बल्लेबाजी ने भारतीय टीम की शुरुआती बढ़त का असर खत्म कर दिया। वेस्टइंडीज ने चार विकेट गंवाकर लक्ष्य पार कर लिया और भारत को बड़े स्कोर के बावजूद हार झेलनी पड़ी।

गंभीर ने गेंदबाजों की मेहनत और करियर का उठाया मुद्दा

मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर से बल्ले और गेंद के बीच बेहतर मुकाबले को लेकर सवाल किया गया। जवाब में उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट भी यही चाहता है कि मुकाबला दोनों पक्षों के लिए संतुलित हो।

गंभीर का कहना था कि गेंदबाज भी कड़ी मेहनत करके भारतीय टीम तक पहुंचे हैं। उनके भविष्य और करियर का महत्व भी उतना ही है। इसलिए ऐसी परिस्थितियां मिलना बेहतर होगा, जहां बल्लेबाजों के साथ गेंदबाजों को भी अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिले।

उनके बयान का आशय गेंदबाजों को टीम से बाहर करने की चेतावनी देना नहीं था। उन्होंने बल्लेबाजी के अनुकूल परिस्थितियों में गेंदबाजों की चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया और बराबरी के मुकाबले की जरूरत बताई।

ओस और सपाट पिच की चुनौती, फिर भी सुधार जरूरी

गंभीर ने माना कि सपाट पिच और ओस के बीच गेंदबाजी करना मुश्किल होता है। हालांकि, उन्होंने केवल टॉस को हार की वजह मानने से इनकार किया।

उनके मुताबिक, भारतीय टीम को यह समझना होगा कि जब पिच से ज्यादा मदद न मिले और ओस भी हो, तब विपक्षी बल्लेबाजों को कैसे रोका जाए। खासतौर पर शुरुआती विकेट मिलने के बाद उस बढ़त को बरकरार रखना जरूरी है।

गंभीर ने कहा कि विश्व चैंपियन टीम होने के बावजूद भारत को लगातार सुधार करते रहना है। मुश्किल परिस्थितियों में भी मुकाबला जीतने के रास्ते तलाशना टीम की जिम्मेदारी है।

शाई होप और वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी को दिया श्रेय

भारतीय कोच ने विपक्षी टीम की तारीफ भी की। उन्होंने माना कि वेस्टइंडीज ने लक्ष्य का पीछा करते हुए बेहतरीन बल्लेबाजी की और जीत की हकदार रही।

शाई होप की पारी पर गंभीर ने कहा कि वह विश्वस्तरीय बल्लेबाज हैं। उनकी बल्लेबाजी ने भारतीय गेंदबाजों के लिए चुनौती बढ़ाई। शुरुआती झटकों के बावजूद वेस्टइंडीज ने जिस तरह वापसी की, वह उसकी बल्लेबाजी की ताकत दिखाता है।

बड़े स्कोर के बचाव पर भारत को करना होगा काम

गंभीर ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि भारत 250 रन का लक्ष्य नहीं बचा पाया और टीम को अभी काफी काम करना है। उन्होंने कहा कि वेस्टइंडीज जैसी खतरनाक बल्लेबाजी वाली टीम के खिलाफ केवल बड़ा स्कोर बना देना पर्याप्त नहीं है।

टॉस हारने के बाद भी लक्ष्य का बचाव कैसे किया जाए, इसका रास्ता भारतीय टीम को खोजना होगा। रांची की हार के बाद गंभीर का जोर परिस्थितियों को समझकर गेंदबाजी में सुधार करने और शुरुआती सफलता को जीत में बदलने पर रहा।

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