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छत्तीसगढ़

अरपा नदी प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, 70 नालों के सीवरेज को लेकर मांगा जवाब

बिलासपुर अरपा नदी में बढ़ते प्रदूषण और शहर की सीवरेज व्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने नगर निगम और शासन से विस्तृत कार्ययोजना की जानकारी मांगी है। डिवीजन बेंच ने विशेष रूप से पूछा है कि क्या शहर के करीब 70 नालों से निकलने वाले सीवरेज का पानी केवल चार एसटीपी के जरिए पूरी तरह साफ किया जा सकता है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शासन को नया शपथ पत्र दाखिल कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होगी।

सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव विकासशील की ओर से हाईकोर्ट में शपथ पत्र पेश किया गया। इसमें बताया गया कि शहर में मौजूद एसटीपी के साथ दो नए प्लांट का काम भी चल रहा है। सभी प्लांट पूरे होने के बाद यह आकलन किया जाएगा कि कुल कितने सीवरेज का उपचार हो पा रहा है और भविष्य में अतिरिक्त एसटीपी की आवश्यकता है या नहीं। कोर्ट ने शासन के जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय की है।

शासन के एफिडेविट के मुताबिक बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की आबादी करीब 6 लाख 68 हजार 540 है। शहर से प्रतिदिन लगभग 72.20 एमएलडी सीवरेज निकलता है। इसे सीवरेज नेटवर्क और करीब 70 नालों के जरिए अलग-अलग हिस्सों से चैनलाइज किया जाता है। यही वजह है कि हाईकोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नालों से निकलने वाला गंदा पानी अरपा नदी में पहुंचने से पहले पूरी तरह ट्रीट किया जा रहा है या नहीं।

प्रशासन के अनुसार वर्तमान में शहर में चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 78 एमएलडी है, लेकिन फिलहाल लगभग 43.90 एमएलडी क्षमता का ही उपयोग हो रहा है। इसके अलावा 16 एमएलडी क्षमता वाले दो और एसटीपी निर्माणाधीन हैं। इनमें से एक प्लांट ट्रायल रन के चरण में है, जबकि दूसरे के 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है।

दोनों नए प्लांट शुरू होने के बाद शहर की कुल सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़कर 94 एमएलडी हो जाएगी। यह मौजूदा अनुमानित 72.20 एमएलडी सीवरेज उत्पादन से अधिक है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रशासन से यह भी पूछा कि सिर्फ एसटीपी की क्षमता पर्याप्त होना ही काफी है या शहर के सभी नालों का सीवरेज वास्तव में इन प्लांट तक पहुंच भी रहा है।

डिवीजन बेंच ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को नया एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें स्पष्ट रूप से बताना होगा कि नगर निगम क्षेत्र के सभी 70 नाले, मौजूदा चार और निर्माणाधीन दो समेत कुल छह एसटीपी से जुड़े हैं या नहीं। नए एफिडेविट में यह भी स्पष्ट करना होगा कि प्रत्येक नाले से निकलने वाले सीवरेज को किस तरह इंटरसेप्ट, डायवर्ट और ट्रीट किया जा रहा है। साथ ही अरपा नदी में पानी छोड़े जाने से पहले पूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी कोर्ट को देनी होगी।

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