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छत्तीसगढ़रायपुर

क्रांतिकारी कवि सुकांत भट्टाचार्य की जन्मशती पर बड़ा आयोजन, फिर गूंजेगी ‘मुक्ति के फूल’ की हुंकार

       रायपुर। बांग्ला साहित्य के उन कवियों में सुकांत भट्टाचार्य का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है, जिनकी कविताओं में सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि संघर्ष, उम्मीद और बदलाव की आवाज सुनाई देती है। 15 अगस्त 1926 को जन्मे सुकांत ने बेहद कम उम्र में साहित्य की दुनिया में अपनी ऐसी पहचान बनाई, जिसका प्रभाव आज भी बांग्ला कविता में महसूस किया जाता है। इस वर्ष उनकी जन्मशती के अवसर पर उनके जीवन और कवि-कर्म को याद किया जा रहा है।

       स्वाधीनता आंदोलन और सामाजिक उथल-पुथल के दौर में सुकांत की कविताओं ने आम लोगों की पीड़ा और संघर्ष को आवाज दी। उनकी रचनाओं में भूख, गरीबी, शोषण और सामाजिक असमानता के खिलाफ तीखा प्रतिरोध दिखाई देता है। यही वजह है कि उन्हें बांग्ला के क्रांतिकारी और विद्रोही कवि के रूप में विशेष पहचान मिली।

       अल्पायु में ही दुनिया को अलविदा कह देने वाले सुकांत का साहित्यिक जीवन भले छोटा रहा, लेकिन उनकी रचनाओं का प्रभाव बेहद व्यापक रहा। उनकी कविताओं में निराशा के बीच बेहतर भविष्य का सपना और परिवर्तन की उम्मीद दिखाई देती है। उनके शब्द आज भी पाठकों को यह विश्वास दिलाते हैं कि संघर्ष के बाद मुक्ति और नए समाज की राह खुल सकती है।

       सुकांत भट्टाचार्य की जन्मशती के अवसर पर “शताब्दी स्मरण : सुकांत भट्टाचार्य — खिल उठेंगे मुक्ति के फूल” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कवि-अनुवादक मीता दास और सुलोचना वर्मा सुकांत के जीवन, साहित्य और उनकी कविताओं के सामाजिक प्रभाव पर वक्तव्य एवं संवाद करेंगी।

       कार्यक्रम 15 अगस्त 2026, शनिवार को शाम 7 बजे ऑनलाइन LIVE आयोजित होगा। इसे IndianPWA के Facebook और PWA India के YouTube माध्यम से देखा जा सकेगा।

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       सुकांत को याद करने का यह आयोजन सिर्फ एक कवि की जन्मशती का स्मरण नहीं, बल्कि उन सवालों और सपनों को फिर से सामने लाने का अवसर है, जिनके लिए उनकी कविता आज भी आवाज उठाती है—संघर्ष के बीच उम्मीद और अंधेरे के बीच मुक्ति के फूल खिलने की उम्मीद।

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