Bokaro Steel Plant: यूनियन नेता को सजा देने पर फंसा BSL प्रबंधन, Chief Judicial Magistrate ने पूर्व DIC अतनु भौमिक को किया तलब

- डायरेक्टर इंचार्ज, ईडी पीएंडए एस प्रसाद, जीएम पर्सनल इंचार्ज एसबी झा, जीएम पर्सनल सुरेंद्र सिंह, जीएम पर्सनल बीके ठाकुर बने हैं पार्टी।
- 10 जनवरी 1994 से 200 रुपए प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना देने का आदेश।
- बीएसएल प्रबंधन को 1 लाख और चारों जीएम से 10-10 हजार रुपए भुगतान के आदेश पर अमल नहीं।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल (Steel Authority of India Limited-SAIL) के बोकारो स्टील प्लांट (Bokaro STeel plant) के एक पूर्व कर्मचारी ने प्रबंधन को कानूनी दांव में ऐसा फंसाया है कि सबके होश उड़ गए हैं। यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहने की सजा प्रबंधन ने दो इंक्रीमेंट विद कम्युलेटिव इफेक्ट डाउन करके दी थी।
ये खबर भी पढ़ें: SAIL Foundation Day 2025: भिलाई स्टील प्लांट की निर्माण गाथा दिखेगी लेज़र शो में, बॉलीवुड सिंगर सुनाएंगे गाना
प्रमोशन से वंचित किया गया था। कानून का दामन थामे पूर्व एटक नेता हौसला नहीं हारे और 1981 से लगातार लड़ रहे हैं। अब Chief Judicial Magistrate बोकारो ने पूर्व कार्यवाहक डायरेक्टर इंचार्ज अतनु भौमिक को तलब कर लिया है।
ये खबर भी पढ़ें: भिलाई इस्पात संयंत्र के रेल मिल और आरसीएल में सुरक्षा सप्ताह, हादसों से बचने का मंत्र
17 फरवरी को पेश होने का समन जारी हुआ है। 2022 में जब मामले की सुनवाई शुरू हुई तो उस वक्त राउरकेला स्टील प्लांट के डायरेक्टर इंचार्ज अतनु भौमिक के पास ही बोकारो का अतिरिक्त कार्यभार था। इसलिए वह फंस गए हैं।
ये खबर भी पढ़ें: 150 से अधिक स्टॉल, 900 व्यापारिक संस्था का जमावड़ा 16 से 19 तक, डॉ. विवेक बिंद्रा देंगे बिजनेस आइडिया
एटक के पूर्व पदाधिकारी राम किशोर प्रसाद 1976 में बोकारो स्टील प्लांट के इंगट मोल्ड फाउंड्री ऑपरेटर के रूप में सेवा शुरू की थी। ट्रेड यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहने पर 1981 में चार्जशीट दी गई। जांच होती रही। 1983 में दो इंक्रीमेंट रोकने का आदेश जारी हुआ।
ये खबर भी पढ़ें: SAIL NEWS: डायरेक्टर Technical, Projects, Raw Materials बने मनीष गुप्ता, दुर्गापुर, ISP, बोकारो स्टील प्लांट से नाता
सेल बीएसएल प्रबंधन के फैसले के खिलाफ लेबर कोर्ट में अपील किया। 10 जनवरी 1994 को लेबर कोर्ट ने पक्ष में फैसला दिया। सारे भुगतान और इंक्रीमेंट को बहाल होने का आदेश हुआ।
ये खबर भी पढ़ें: मकर संक्रांति 2025: जमकर पतंग उड़ाइए, पर चाइनीज-नायलॉन मांझे से मत काटिए जिंदगी की डोर, भिलाई निगम ने मारा छापा
2005 में झारखंड हाईकोर्ट गए
लेकिन अमल नहीं होने पर 2005 में झारखंड हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने डिप्टी लेबर कमिशन को निर्देशित किया कि सारी सुविधाओं को बहाल कराया जाए। इसके आधार पर बीएसएल प्रबंधन को बुला डिप्टी लेबर कमिशनर ने समझौता वार्ता की। चेतावनी दिया कि अगर कोर्ट के आदेश पर अमल नहीं किया गया तो अन्यथा मुकदमा दायर करेंगे।
ये खबर भी पढ़ें: SAIL NEWS: आलोक वर्मा ने राउरकेला इस्पात संयंत्र के डायरेक्टर इंचार्ज का संभाला कार्यभार
2007 में सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज
डिप्टी लेबर कमिशनर ने 2007 में सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया। 10 जुलाई 2008 को प्रबंधन हाईकोर्ट गया और केस बंद हो गया। इसके बाद 2008 में ही पीड़ित कर्मचारी नेता सुप्रीम कोर्ट गए। 2013 से सुप्रीम कोर्ट से सीजेएम कोर्ट को आदेश दिया और जांच शुरू हुई।
ये खबर भी पढ़ें: BSP सिंटर प्लांट और एसएमएस-3 के सीजीएम आमने-सामने, खिलाड़ियों ने संभाला मोर्चा
2022 में तत्कालीन डायरेक्टर इंचार्ज, ईडी पीएंडए एस प्रसाद, जीएम पर्सनल इंचार्ज एसबी झा, जीएम पर्सनल सुरेंद्र सिंह, जीएम पर्सनल बीके ठाकुर को पार्टी बनाया गया। साथ ही यह आदेश हुआ कि 10 जनवरी 1994 से 200 रुपए प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना दिया जाए। बीएसएल प्रबंधन को 1 लाख और चारों जीएम से 10-10 हजार रुपए भुगतान का आदेश जारी हुआ।
ये खबर भी पढ़ें: CITU नेता पीई अंताप्पन का निधन, शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज को देहदान, डाक्टर करेंगे रिसर्च
राम किशोर प्रसाद 1 सितंबर 2015 में रिटायर
बीएसएल प्रबंधन (BSL Management) ने इस आदेश के खिलाफ डिस्ट्रिक जज बोकारो के यहां अपील किया। वहां भी केस खारिज हो गया। इसके बाद वह हाईकोर्ट चला गया। जून 2024 में लेबर कोर्ट ने आदेश जारी किया कि बकाया पैसा है, इसका भुगतान कीजिए। इसी के साथ पुरानी फाइल फिर से खुल गई है।
ये खबर भी पढ़ें: भिलाई स्टील प्लांट: 8 घंटे तक लगातार महामंथन, ईडी वर्क्स अंजनी कुमार और ईडी एचआर पवन कुमार भी दे गए मंत्र
बता दें कि राम किशोर प्रसाद 1 सितंबर 2015 में रिटायर हो गए हैं। जिस कलस्टर में ज्वाइन किए, उसी पर रिटायर हो गए। आज तक कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
प्रबंधन के कुछ अधिकारियों के द्वारा किए गए इस प्रकार के कृत्यों से कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचने के साथ ही आर्थिक हानि हुई। साथ ही एक कर्मचारी को अपने पूरे सेवा काल में मानसिक,आर्थिक रूप से परेशान करना एक महारत्न प्रबंधन के लिए निंदनीय है।
ये खबर भी पढ़ें: बोकारो जनरल हॉस्पिटल को सुपर स्पेशलिटी यूनिट बनाने एमओयू साइन, पढ़िए डिटेल
The post Bokaro Steel Plant: यूनियन नेता को सजा देने पर फंसा BSL प्रबंधन, Chief Judicial Magistrate ने पूर्व DIC अतनु भौमिक को किया तलब appeared first on Suchnaji.
