
एनआईए कोर्ट, बिलासपुर ने प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस को दी जमानत
(सबूतों के अभाव और पीड़िताओं की गवाही के आधार पर हुआ रिहाई का निर्णय)
नारायणपुर की तीन आदिवासी लड़कियों के साथ जा रही थीं नन, भाजपा समर्थकों ने लगाए आरोप
(धर्मांतरण और मानव तस्करी का मामला संसद तक पहुंचा)
लड़कियों ने पुलिस पर लगाया जबरदस्ती और मारपीट का आरोप, धर्मांतरण से किया इनकार
(मामले में पीड़ित पक्ष की गवाही बनी रिहाई का आधार)
राजनीतिक गर्मी के बीच न्यायिक प्रक्रिया ने दी राहत, फैसले पर बंटी प्रतिक्रियाएं
(मामले की गंभीरता के बावजूद न्यायालय का निर्णय तथ्यों पर आधारित रहा)
बिलासपुर| दुर्ग रेलवे स्टेशन से धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार की गईं कैथोलिक नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस को एनआईए कोर्ट, बिलासपुर ने सबूतों के अभाव में जमानत पर रिहा कर दिया है।
दोनों नन नारायणपुर जिले की तीन आदिवासी लड़कियों के साथ आगरा जा रही थीं, जिनके खिलाफ भाजपा समर्थक संगठनों ने धर्मांतरण व मानव तस्करी का आरोप लगाया था। मामला इतना गंभीर हो गया कि सांसद विजय बघेल ने इसे मानसून सत्र में भी उठाया।
हालांकि, लड़कियों ने धर्मांतरण से इनकार करते हुए पुलिस पर जबरदस्ती और मारपीट का आरोप लगाया। कोर्ट में पेश सबूतों के अभाव में और पीड़िताओं की गवाही के आधार पर न्यायालय ने ननों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।



